नवीन गायकों को तराश कर उन्हें मंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध "नवांकुर स्वर शाला" हर बार की तरह इस बार भी एक अनूठी परिकल्पना लेकर आ रही है, जिसके अंतर्गत श्वेत श्याम युग के बेहतरीन सदाबहार गीतों को एक अनोखे अंदाज में संगीत प्रेमियों के सम्मुख प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें स्वर शाला के सुरीले गायक, कलाकार एवं साजिंदे श्वेत श्याम परिधानों में कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। हाल की सज्जा भी इसी अनुसार होगी।
रविन्द्र भवन में 14 अप्रैल को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में आने वाले श्रोताओं से स्वर शाला द्वारा श्वेत-श्याम परिधान में आने का अनुरोध किया जा रहा है। नवांकुर स्वर शाला संगीत गुरु अनूप श्रीवास्तव द्वारा डिजाइन किया गया है, जो कि संगीत प्रेमियों के लिए अतिरिक्त आकर्षण होगा। इस कार्यक्रम में स्वर शाला के छात्र मस्ती भरे गीतों के साथ कुछ उपशास्त्रीय गीत जैसे मधुबन में राधिका नाचे रे, कुहू कुहू बोले कोयलिया, लगा चुनरी में दाग आदि प्रस्तुत करेंगे।
सामान्यतः वर्ष 1963 के पूर्व की फिल्म श्वेत श्याम हुआ करती थीं। ये वह दौर था जब गीतों की रिकॉर्डिंग पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ होती थी और रिकॉर्डिंग के दौरान सभी गायक और साजिंदे एक साथ ही गीतों की रिकॉर्डिंग करते थे। तब रिकॉर्डिंग के लिए ट्रैक सिस्टम और ऑटो ट्यूनर आदि की व्यवस्था नहीं होती थी और गायकों की गुणवत्ता ही उनकी पहचान होती थी। इसीलिए वो मधुर गीत आज भी अमर हैं। यह कार्यक्रम स्वर शाला की 7वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।











