स्काई न्यूज का दावा है कि उसने चीनी मुसलमानों के प्राचीन हुई समुदाय पर जिनपिंग सरकार की नीति के प्रभाव की जांच में कई महीने बिताए हैं। इसमें मुस्लिमों की इमारतों में बदलाव, धार्मिक स्थानों में कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधारा की एंट्री, भाषा और सांस्कृतिक प्रथाओं पर रोक जैसे कदमों का अध्ययन शामिल है। रिपोर्ट में बताया है कि चीनी मुसलमानों के बारे में बात होने पर अक्सर उइगरों की चर्चा होती है, ये समुदाय पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में रहता है। इस समुदाय के खिलाफ चीनी सरकार ने सामूहिक गिरफ्तारी समेत कई अभियान चलाए हैं लेकिन वे चीन के एकमात्र मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं। 2020 की जनगणना के अनुसार, 'हुई' चीन का सबसे बड़ा मुस्लिम समूह है, जिसकी आबादी पूरे देश में 1 करोड़, 10 लाख है। उन्हें आधिकारिक तौर पर एक जातीय श्रेणी के रूप में नामित किया गया है। वे चीनी बोलते हैं और पूरे देश में फैले हुए हैं। विशेषज्ञ उन्हें चीन के सबसे अधिक आत्मसात मुस्लिम समूह के तौर पर देखते हैं।
मुस्लिम बच्चे अरबी नहीं पढ़ सकते, मस्जिदों में कम्युनिस्ट पार्टी के बुकलेट... मुस्लिमों पर यूं शिकंजा कस रहा है चीन
इस्लामाबाद: चीन में मुस्लिमों के साथ भेदभाव की एक बार फिर से चर्चा हो रही है। ये बहस हाल ही में तब शुरू हुई जब चीन ने अरबी शैली में बनी आखिरी बड़ी मस्जिद में भी बदलाव करते हुए उसे चीनी वास्तुकला से बदल दिया। सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर मीडिया रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि चीन की आखिरी बड़ी मस्जिद की इमारत में बदलाव करते हुए गुंबद और मीनारों को हटा दिया गया है चीन में बीते कुछ सालों में लगातार ऐसी नीतियों को लागू किया गया है, जो अल्पसंख्यक मुस्लिमों को काबू करने की कोशिश लगती हैं। स्काई न्यूज ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि शी जिनपिंग ने चीन में एक स्पष्ट नीति लागू की है, जो धर्म के 'चीनीकरण' पर जोर देती है। इसका मकसद लोगों पर धर्म के प्रभाव को कम करना और इसे अधिक 'चीनी' बनाना है।











