निगम वाले संपत्ति कर की वसूली में पिछड़े:एक महीने की छूट

निगम वाले संपत्ति कर की वसूली में पिछड़े:एक महीने की छूट
रायपुर, हर साल की तरह इस साल भी निगम वाले संपत्ति कर की वसूली में पिछड़ गए। सबसे पहले दिसंबर 2025 तक प्रॉपर्टी टैक्स देने में छूट, बिना दफ्तर आए ऑनलाइन टैक्स देने की सुविधा फिर जनवरी से मार्च तक ताबड़तोड़ कार्रवाई। इसके बावजूद पूरा संपत्ति कर नहीं आया। निगम वालों ने तय किया था 2025-26 में 370 करोड़ का प्रॉपर्टी टैक्स वसूल करना है।

31 मार्च 2026 तक 310 करोड़ आए। पूरी वसूली नहीं कर पाए इसलिए फैसला लिया कि मार्च नहीं अब 30 अप्रैल तक वसूली की जाएगी। एक महीने में 34 करोड़ की वसूली का टारगेट तय किया। लेकिन इसमें भी पिछड़ गए। केवल 20 करोड़ ही वसूल हुए। आखिरी में कुल कलेक्शन 330 करोड़ तक ही पहुंचा। संपत्ति कर की वसूली में हर साल पिछड़ने का सीधा असर निगम के विकास कामों पर पड़ रहा है।

दैनिक भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि निगम को इस साल 400 करोड़ से ज्यादा संपत्ति कर मिल सकता था। लेकिन बड़े बकायादारों से संपत्ति कर की वसूली ही नहीं हो पाई। निगम में केवल 200 से 250 लोगों से ही 100 करोड़ की वसूली करना है। इन पर संपत्ति कर करीब तीन साल से बकाया है।

5000 खाली प्लॉट पर 25 करोड़ का टैक्स

करीब एक साल की मेहनत के बाद नगर निगम ने सभी 10 जोन में करीब 5000 खाली प्लॉट की सूची बनाई, जिससे टैक्स वसूल करना था। इन सभी से करीब 25 करोड़ बकाया संपत्ति कर लेना था। लेकिन निगम वाले इनसे भी टैक्स नहीं ले पाए। इसमें बड़ी संख्या में बिल्डर और उद्योगपति हैं जिनके पास बड़े साइज में खाली प्लॉट हैं। निगम वालों ने इन्हें डिमांड नोट भी भेजा, लेकिन उन्होंने दिया ही नहीं। निगम वालों ने सख्ती भी नहीं की। इस वजह से खाली प्लॉट से पिछले वित्तीय साल में 5 करोड़ के आसपास की ही वसूली हो पाई। अब निगम वाले फिर कह रहे हैं कि इस साल सख्ती से वसूली कर ली जाएगी।

रायपुर के ये हैं बड़े बकाए वाले जोन, जहां अभी तक नहीं हो पाई वसूली

  • जोन 8: टाटीबंध, हीरापुर, कबीर नगर, औद्योगिक क्षेत्र और बड़ी स्टील व एनर्जी फैक्ट्रियां होने के कारण यह जोन बड़े बकायादारों की सूची में सबसे ऊपर है। यहां केवल 19 बड़े बकायेदारों पर करीब 85 लाख का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। कुल बकाया करोड़ों में है।
  • जोन 5: सुंदर नगर, लाखे नगर, ईदगाहभाठा का इलाका व्यावसायिक रूप से काफी सक्रिय है। यहां बड़े कमर्शियल आउटलेट्स पर भारी टैक्स पेंडिंग है। यहां दर्जनों सिंगल बकायेदार ऐसे हैं जिन पर 13-13 लाख का संपत्ति कर बकाया है। कोई कार्रवाई नहीं की गई।
  • जोन 10: तेलीबांधा, न्यू राजेंद्र नगर, मोवा के साथ नई वीआईपी और कमर्शियल हब वाले इन इलाकों में 18 बड़े बकायेदारों पर करीब 50 का टैक्स बकाया। इसमें बड़े रेस्टोरेंट, क्लब, अस्पताल और कांप्लेक्स वाले शामिल हैं।
  • जोन 9: पंडरी, मोवा, दलदल सिवनी, पंडरी कपड़ा मार्केट और बड़े व्यावसायिक परिसर इसी क्षेत्र में आते हैं। यहाँ 12 बड़े डिफाल्टरों पर ही 50 लाख से ज्यादा का संपत्ति कर बकाया है। जोन का कुल बकाया भी करोड़ों में है। इस साल भी पूरी वसूली नहीं हो पाई।

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