देवेंद्र नगर निवासी परिवादी सुरजीत सिंह छाबड़ा ने बताया कि उन्होंने घरेलू उपयोग के लिए यूरेका फोर्ब्स का डॉ. एक्वागार्ड क्लासिक प्लस वाटर फिल्टर खरीदा था। मशीन के रखरखाव के लिए उन्होंने कंपनी से 5,941 रुपए में दो साल का एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (एएमसी) भी लिया था, जिसकी वैधता 11 सितंबर 2026 तक थी।
शिकायत के अनुसार, 6 सितंबर 2025 को वाटर फिल्टर में खराबी आ गई। इसकी सूचना कंपनी को दी गई, जिसके बाद टेक्नीशियन मौके पर पहुंचा। जांच में पंप खराब पाया गया। टेक्नीशियन ने एक-दो दिन में पंप बदलने का आश्वासन दिया, लेकिन कई दिनों तक संपर्क करने के बावजूद न तो पंप बदला गया और न ही मशीन ठीक की गई। पंप बदलने में देरी के कारण परिवादी को साफ पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ी। मजबूरी में उन्हें बाजार से बोतलबंद पानी खरीदकर उपयोग करना पड़ा।
एएमसी होने के बावजूद सेवा नहीं मिलने पर उन्होंने उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया। आयोग ने यूरेका फोर्ब्स को निर्देश दिया कि वह 45 दिनों के भीतर वाटर फिल्टर की निशुल्क मरम्मत करे। यदि ऐसा संभव नहीं हो तो परिवादी को नया फिल्टर उपलब्ध कराया जाए। साथ ही मानसिक कष्ट के लिए कंपनी को 50 हजार रुपए मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है।
स्वच्छ पेयजल को बताया मूलभूत आवश्यकता
फोरम की ओर से नोटिस जारी होने के बाद कंपनी ने एक बार उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन बाद की सुनवाई में कोई जवाब या तर्क प्रस्तुत नहीं किया। इसके चलते आयोग ने एकतरफा सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि स्वच्छ पेयजल जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। वैध एएमसी होने के बावजूद उपभोक्ता को निशुल्क मरम्मत सेवा उपलब्ध नहीं कराना सेवा में कमी है।











