एससीओ बैठक में हिस्सा लेने के लिए रूस के पीएम मिखाइल मिशूस्टीन 300 सदस्यों का भारी भरकम दल लेकर इस्लामाबाद पहुंचे थे। पाकिस्तान और रूस ने पिछले 2 दशक से मजबूत हो रहे रिश्तों को और बेहतर करने के लिए सहयोग पर जोर दिया। रूस और पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों पर एक-दूसरे का सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान रूस के साथ राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस पर रूस के पीएम ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाया जाएगा।
रूस को साधकर क्या चाहता है पाकिस्तान ?
रूसी नेता ने कहा कि उनका देश पाकिस्तान के साथ व्यापार बढ़ाना चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार में इस साल 13 फीसदी की तेजी आई है। रूस ने कहा कि उसने पाकिस्तान को ऊर्जा की सप्लाई बढ़ा दी है। रूसी कंपनियां पाकिस्तान में गैस उद्योग का विकास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि रूस का मानना है कि पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति बेहद फायदेमंद है। विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान रूस की खुशामद करके एक तीर से कई शिकार करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान चाहता है कि उसे ब्रिक्स की सदस्यता मिले।
रूस के कजान में ब्रिक्स की शिखर बैठक होने जा रही है और इसमें 10 नए सदस्यों को शामिल करने पर फैसला होगा। पाकिस्तान समेत 34 देशों ने ब्रिक्स में सदस्यता के लिए आवेदन किया है। पाकिस्तान को पर्दे के पीछे से चीन से मदद मिल रही है, वहीं भारत विरोध कर रहा है। पाकिस्तान चाहता है कि रूस अपना दबाव डालकर भारत का विरोध खत्म कराए ताकि ब्रिक्स की सदस्यता का रास्ता साफ हो। भारत ब्रिक्स का संस्थापक देश है और बिना उसकी अनुमति के पाकिस्तान को सदस्यता नहीं मिल पाएगी।
रूस ने भारत को दिया संदेश ?
इसके अलावा रूस भारत को करीब 60 फीसदी हथियारों की आपूर्ति करता है, पाकिस्तान चाहता है कि रूस के साथ रक्षा सहयोग को बढ़ाकर भारत के प्रभाव को कम किया जा सके। कई विश्लेषकों का कहना है कि भारत इन दिनों अमेरिका के साथ जमकर हथियार खरीद रहा है और रूस पाकिस्तान से दोस्ती के जरिए नई दिल्ली को संदेश देने की कोशिश कर रहा है। वहीं पाकिस्तान चाहता है कि वह मुंबई कॉरिडोर का हिस्सा बने और अपने चीन की मदद से बन रहे सीपीईसी को उससे जोड़ दे।











