आपने अपनी नई फिल्म में खुद के बजाय अरशद वारसी को लिया, क्या आपको मुख्य भूमिका के प्रलोभन ने नहीं सताया?
मैं क्रिएटिव प्रोड्यूसर हूं। जब मैंने पटना शुक्ला भी बनाई, तो मैं खुद को चुन सकता था, मगर मैंने नहीं किया। ये फिल्म मेरे पास लेट आई, तब तक इसका काफी प्रोग्रेस हो चुका। इस फिल्म में खुद को कास्ट करने की उतनी संभावना नहीं थी। मैं अपनी फिल्मों में खुद को जबरदस्ती ठूंसने में यकीन नहीं करता। मैं मानता हूं कि किसी फिल्म में मैं एडेड वैल्यू ला सकता हूं। एक असेट हो सकता हूं। बीते सालों में मैंने एक अभिनेता के रूप में इतना इंप्रूव तो किया है, मगर सिर्फ मेरी वजह से लोग फिल्म देखने आएंगे, ये मुकाम हासिल करने में मुझे अभी वक्त है और मैं वो चांस नहीं लेना चाहता। मगर फिल्म मेकर के रूप में मैं वो चांस ले सकता हूं।
आपके करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण काम क्या था?
एक्सपेक्टेशन की बात करें, तो भाई सलमान खान की वजह से आप पर हमेशा उम्मीदों की तलवार लटकती रही? उससे आप कैसे डील करते हैं?
मगर मेरे पास आज भी फिल्मों के ऑफर आते हैं। मैंने अपने करियर में दो-तीन और स्ट्रीम अपना ली हैं। मैंने अपना शो होस्ट करता हूं। मैंने निर्देशन में हाथ आजमाया। मैं निर्माण के क्षेत्र में हूं। मैं खुश हूं, मेरी गाड़ी चल रही है। बॉबी देओल का भी एक ऐसा समय था, जब उसके पास एक लंबे अरसे तक काम नहीं था, मगर जब चल गया, तो आज उसके पास डेट्स नहीं है, तो कब किसकी किस्मत बदल जाए, क्या कहा जा सकता है। बस आपको काम करते रहना होगा। आप मैदान में होंगे, तब गोल मार पाएंगे न?
आपके लिए सबसे मुश्किल दौर कौन-सा था?
मुझे लगा कि मुझे तो नाम कमाना है, अब मैं वो एक्टिंग से कमाऊं या प्रोडक्शन से अथवा डायरेक्शन से क्या फर्क पड़ता है। अब मैं अपने एक्टिंग के शौक को लेकर बैठूं, तो कैसे काम चलेगा। मैंने अभिनय को काफी समय दे दिया है। मुझे इसे छोड़ना होगा और अब इसमें जो जब होगा, देखा जाएगा, तो मुश्किल दौर के बाद वो मेरा ट्रांजिशन का दौर था। आज अगर सुभाष घई, राकेश रोशन, शेखर कपूर जैसे लोग एक्टिंग में ही लगे रहते तो इतने बड़े फिल्मकार न बन पाते। आज अगर लोग पूछें कि अरबाज खान बेटर एक्टर या बेटर प्रोड्यूसर, तो दबंग उसका जवाब है कि बेहतर फिल्मकार।
शूरा के साथ आपकी शादी ने आपको कितना बदला है? सोशल मीडिया पर तो आप लोगों की जोड़ी काफी चर्चित रहती है।
देखिए, उतार-चढ़ाव तो होंगे ही। लेकिन उन्हें कैसे संभालना है और उनमें कैसे सब्र से काम लेना है। सबसे पहले तो आपको ये यकीन हुआ चाहिए कि ये पर्सन मेरे लिए सही है और मेरा वेलविशर है और मैं भी इसका अच्छा चाहता हूं। शूरा मेरी जिंदगी में ब्लेसिंग की तरह है। हम एक-दूसरे के दोस्त हैं। एक-दूसरे को समझते हैं। हालांकि हमारी उम्र में फर्क है, मगर हम लोगों को लगता ही नहीं वो फर्क। हम अपनी जिंदगी के हर पहलू में परस्पर कंफर्टेबल हैं। वो बहुत ही हौसला देती है। काम में बहुत पुश करती है। खुश होती है, जब मैं काम में अच्छा करता हूं। कई बार जब आपका पार्टनर अच्छा करता है, तो आप खुश नहीं होते। आप दोनों में ईगो प्रॉब्लम होता है और यही समस्या का कारण बनता है। वो मेरा बेस्ट निकालती है। मैं बहुत खुश हूं। मुझे और क्या चाहिए।











