रविवार को जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर नगर मजिस्ट्रेट (ACM) दीपक माथुर, तहसीलदार सदर रवि प्रजापति और स्थानीय थाना पुलिस बल के साथ मंदिर परिसर पहुंचे। दोनों पक्षों की मौजूदगी में मंदिर का निरीक्षण किया गया और वहां रखे दानपात्र, चांदी का रथ, पूजा सामग्री, पंखे, कुर्सियां और अन्य सामान प्रशासनिक निगरानी में लिया गया। मंदिर परिसर के कुछ कमरों को भी सीलनुमा निगरानी में रखा गया है
रामायण काल और मंदोदरी से जुड़ी मान्यता
बिल्वेश्वर नाथ मंदिर को लेकर स्थानीय स्तर पर गहरी धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताएं प्रचलित हैं। मंदिर परिसर में भारतीय पुरातत्व विभाग का बोर्ड भी लगा हुआ है। इतिहासकारों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्थल रामायण काल से जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी यहां स्थित शिवालय में पूजा-अर्चना करने आती थीं और भगवान शिव के आशीर्वाद से उन्हें रावण जैसा विद्वान और पराक्रमी पति मिला। इसी मान्यता के चलते मेरठ को रावण की ससुराल भी कहा जाता है।मंदिर प्रबंधन विवाद बना तनाव की वजह
सदर स्थित इस परिसर में बिल्वेश्वर मंदिर, श्री जगन्नाथ मंदिर और बालाजी मंदिर मौजूद हैं। बिल्वेश्वर मंदिर को वर्ष 1967 में राज्य संरक्षित घोषित किया गया था। लेकिन पिछले करीब दो वर्षों से श्री जगन्नाथ मंदिर के प्रबंधन और संचालन को लेकर विवाद लगातार गहराता गया।एक पक्ष में मंदिर के पुजारी पंडित गणेश शर्मा और विष्णु शर्मा हैं, जबकि दूसरे पक्ष में श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर समिति और सेवा ट्रस्ट के पदाधिकारी शामिल हैं। वर्ष 2025 में जगन्नाथ रथयात्रा और बलदेव छठ के दौरान प्रसाद चढ़ाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि हाथापाई तक की नौबत आ गई थी। उस दौरान कैंट विधायक अमित अग्रवाल समेत कई जनप्रतिनिधियों के सामने भी हंगामे की स्थिति बनी थी।











