*मास्टर प्लान*
*ऐसा हो जो व्यक्ति को स्वच्छ स्वस्थ एवं प्राकृतिक वातावरण के साथ सुखद सुलभ जीवनदायी बनाये।*
शहर का विस्तार करने के बजाय गांवो को ही शहर बनाने का मास्टर प्लान बनाएं।
शहर और फिर महाशहर बनाने से व्यक्ति जिंदगी सुखद नहीं जी रहा बल्कि भाग दौड की मुश्किल और तकलीफ भरी जी रहा है।
मास्टर प्लान में शहरो की सीमा बढ़ाने की बजाय गांवो का एक समूह बनाकर उसे ही शहर का रूप दिया जाए तभी व्यक्ति सुखद जिंदगी जी सकेगा और *प्राकृतिक वातावरण में सांस ले सकेगा।*
गांव की स्थिति भी सुधरेगी पलायन Migration रूकेगा और महाशहरों में जो उच्च घनत्व जनसंख्या (High density popullation) है उससे उत्पन्न प्रदूषण भी रुकेगा।
नौकरी रोजगार और व्यापार के लिए उसे घंटो सफर नहीं करना पड़ेगा, उसके आवा जाही मे समय की बचत होने पर वह अपने परिवार के साथ ज्यादा रह सकेगा।
*महानगर बसाने पर अधिकतर चीजे केंद्रीकृत हो जाती है, फिर हम उसके विकेंद्रीकरण पर ध्यान देते हैं।*
जल के स्त्रोत, सिवेज एवं कचरा निपटान केन्द्र, यातायात सुलभता, धूप और ताजी हवा युक्त रहवास, कृषी जैसे अनेक विषय के लिए शहरो का विकेंद्रीकरण जरूरी है।
अशोक मेहता, इंदौर
(लेखक पत्रकार वास्तुविद एवं पर्यावरणविद्)











