बिहार के डिप्टी CM तेजस्वी यादव ने रविवार को DMK सांसद दयानिधि मारन के टॉयलेट साफ करने वाले बयान की निंदा की। मारन ने कहा था कि UP-बिहार के हिंदी बोलने वाले लोग हमारे राज्य में आकर टॉयलेट और सड़क साफ करते हैं।
इस पर तेजस्वी यादव ने कहा- मारन का बयान गलत है। बिहार और UP के मजदूरों की पूरे देश में लोग मांग करते हैं, अगर वे न जाएं तो उनकी जिंदगी ठप्प हो जाएगी। दूसरे राज्यों के नेताओं को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए।
यादव ने आगे कहा कि RJD की तरह तमिलनाडु के CM एमके स्टालिन की अध्यक्षता वाली DMK एक ऐसी पार्टी है जो सामाजिक न्याय में विश्वास करती है और ऐसी पार्टी के नेता के लिए ऐसी टिप्पणी करना अशोभनीय है।
BJP ने शेयर किया था मारन का वीडियो
BJP नेता शहजाद पूनावाला ने DMK सांसद का यह बयान देते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था।
BJP ने कहा- हिंदुओं और सनातन को गाली देना, लोगों को बांटकर राजनीति करना I.N.D.I.A में शामिल पार्टियों के DNA में है। दयानिधि मारन ने बयान 2019 में दिया था। इस पर तेजस्वी ने अब रिएक्शन दिया है।
ये पहला मामला नहीं है, जब DMK के किसी नेता ने हिंदी भाषी राज्यों पर बयान दिया है। हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान DMK सांसद डॉ. सेंथिल कुमार ने हिंदी भाषी राज्यों को गोमूत्र स्टेट्स बताया था।
सेंथिल ने कहा था- BJP में सिर्फ गोमूत्र स्टेट्स जीतने की ताकत
लोकसभा में भाषण देते हुए सेंथिल ने 5 दिसंबर को कहा- BJP की ताकत केवल हिंदी बेल्ट के उन राज्यों को जीतने में ही है, जिन्हें हम आमतौर पर गोमूत्र राज्य कहते हैं। दक्षिण के राज्यों में BJP को घुसने नहीं दिया गया है।
सेंथिल कुमार ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में BJP की जीत के खिलाफ यह बयान दिया था। तेलंगाना में कांग्रेस की जीत हुई थी। मिजोरम सहित इन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे 3 दिसंबर को आए थे।
तमिलनाडु CM बोले- हम हिंदी के गुलाम नहीं
गृह मंत्री अमित शाह ने 4 अगस्त को एक बैठक में कहा था कि सभी राज्यों को हिंदी स्वीकार करनी चाहिए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस पर आपत्ति जताते हुए 5 अगस्त को एक ट्वीट किया।
उन्होंने लिखा- अमित शाह गैर-हिंदी राज्यों पर जबरदस्ती हिंदी थोप रहे हैं। तमिलनाडु इसे स्वीकार नहीं करेगा, हम हिंदी के गुलाम नहीं बनेंगे। कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे और स्टेट भी इसका विरोध कर रहे हैं।
तमिलनाडु में हिंदी का विरोध 88 साल पुराना
तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में हिंदी नहीं पढ़ाई जाती है। वहां 90 के दशक तक इन स्कूलों में हिंदी के शिक्षक होते थे। बाद में इस विषय को हटा लिया गया। हालांकि, भाषा विकल्प के रूप में हिंदी आज भी है। केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति लाने जा रही है, जिसमें तीन भाषाओं को सीखने का प्रावधान है। तमिलनाडु की DMK सरकार इसका भी विरोध कर रही है।
तमिलनाडु में सबसे ज्यादा हिंदी सीख रहे लोग
दक्षिण राज्यों में हिंदी की परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा (DBHP) के अनुसार, तमिलनाडु के लोगों में हिंदी सीखने की ललक बढ़ी है। 2022 में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कुल 5,12,503 लोग हिंदी की परीक्षा में बैठे थे। इनमें अकेले तमिलनाडु के 2.86 लाख परीक्षार्थी थे, जो बाकी राज्यों से ज्यादा हैं। 2018 में तमिलनाडु में ये आंकड़ा 2.59 लाख था।











