MP में हाईराइज इमारतों को हरी झंडी: 15 मंजिल की बिल्डिंगें होंगी 'न्यू नॉर्मल', नए भूमि विकास नियम 2026 का ड्राफ्ट तैयार

MP में हाईराइज इमारतों को हरी झंडी: 15 मंजिल की बिल्डिंगें होंगी 'न्यू नॉर्मल', नए भूमि विकास नियम 2026 का ड्राफ्ट तैयार

भोपाल। मध्य प्रदेश में बहुमंजिला इमारतों (हाईराइज बिल्डिंग्स) के निर्माण की राह अब बेहद आसान होने जा रही है। राज्य सरकार वर्ष 2012 के लगभग 14 साल पुराने भूमि विकास नियमों को बदलकर 'भूमि विकास नियम 2026' लागू करने जा रही है।

नए नियमों के ड्राफ्ट में इमारतों की ऊंचाई, फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) और प्लॉट पर निर्माण की सीमाओं में कई बड़े व व्यावहारिक संशोधन किए गए हैं। इन बदलावों के लागू होने के बाद प्रदेश के प्रमुख शहरों में 15 से 20 मंजिल तक की इमारतें बनना एक सामान्य प्रक्रिया (न्यू नॉर्मल) बन जाएगा।

3 प्रमुख बदलावों से समझें कैसे खुलेगी हाईराइज की राह

1. ऊंचाई की सीमा 30 मीटर से बढ़कर होगी 45 से 60 मीटर
वर्तमान नियम: अभी 30 मीटर (लगभग 10 मंजिल) से ऊंची इमारतों की फाइल विशेष अनुमति के लिए नगर निगम कमिश्नर की कमेटी के पास जाती है।
नया प्रस्ताव: विशेष मंजूरी की इस सीमा को बढ़ाकर 45 से 60 मीटर करने का प्रस्ताव है। इसके बाद 15 से 20 मंजिल तक की इमारतों के लिए विशेष अनुमतियों की कागजी कसरत से मुक्ति मिलेगी।
2. एफएआर 3 से बढ़कर होगा 4: कम जमीन पर ज्यादा निर्माण
प्लॉट के आकार के आधार पर वर्तमान में अधिकतम एफएआर 3 तक मिलता है, जिसे बढ़ाकर 4 किया जा रहा है।
इसमें 2 बेस एफएआर मिलेगा, जबकि बाकी 2 प्रीमियम एफएआर के रूप में बिल्डर या व्यक्ति कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर बिल्ट-अप एरिया का भुगतान कर खरीद सकेगा।
3. एमओएस छोड़ने के बाद पूरी जमीन पर निर्माण संभव
वर्तमान नियम: मार्जिनल ओपन स्पेस छोड़ने के बाद भी निर्माण पर सीलिंग (आवासीय 30%, कमर्शियल 40%, इंडस्ट्री 50% और इंडिविजुअल प्लॉट पर 60%) लागू रहती थी।
नया प्रस्ताव: एमओएस की निर्धारित जगह छोड़ने के बाद बची हुई पूरी जमीन पर निर्माण करने की छूट होगी।

'फ्लैट एफएआर' का नया कॉन्सेप्ट, फर्जी छूट होगी बंद

नए नियमों में 'फ्लैट एफएआर' की पारदर्शी व्यवस्था लागू की जा रही है। अब तक बिल्डर या भवन निर्माता लिफ्ट, कॉरिडोर और कॉमन स्पेस दिखाकर अतिरिक्त छूट ले लेते थे, जिसे नए नियम में खत्म कर दिया गया है। अब जितना ग्राउंड कवरेज होगा, उसी के आधार पर एफएआर की सटीक गणना की जाएगी और उसमें बाद में कोई बदलाव संभव नहीं होगा।

पर्यावरण संरक्षण और ट्रांसपोर्ट हब के पास मिलेगा अतिरिक्त एफएआर

ग्रीन टीडीआर : पर्यावरण और जल स्रोतों का संरक्षण करने वाले भूखंड मालिकों को अवैध निर्माण से रोकने व प्रोत्साहित करने के लिए 'ग्रीन ट्रांसफरबल डेवलपमेंट राइट्स' (टीडीआर) के तहत अतिरिक्त एफएआर दिया जाएगा।
ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट : मेट्रो, रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड के पास सघन व मिक्स्ड-यूज इमारतों के निर्माण पर अतिरिक्त एफएआर मिलेगा, ताकि लोग सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें और निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो।

110 सेक्शन होंगे सरल, मास्टर प्लान तय करेगा पाबंदियां

मास्टर प्लान की भूमिका: शहर के भीतर कहां किस तरह की पाबंदियां रहेंगी और मिक्स्ड लैंड यूज का दायरा क्या होगा, यह संबंधित शहर का मास्टर प्लान तय करेगा।
सरलीकृत फ्रेमवर्क: पुराने नियमों के लगभग 110 सेक्शन को अधिक सरल व स्पष्ट बनाया जा रहा है। लगभग 200 पेजों की नई नियम-पुस्तिका का ड्राफ्ट तैयार है, जिसे जल्द ही उच्च स्तरीय बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा।
Advertisement