सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी शुरुआती पढ़ाई बुलंदशहर में एक मदरसे में की थी। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की और इंडियन आर्मी में शामिल हो गए। साल 1961 में उन्होंने सेना की नौकरी छोड़कर मोटर और बैटरी बनाने के बिजनस में कदम रखा। साल 1975 में परिवार के कहने पर उन्होंने डीएलएफ को रिवाइव करने का बीड़ा उठाया। इसकी स्थापना उसके ससुर चौधरी राघवेंदर सिंह ने 1946 में की थी। इस कंपनी ने बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए लोगों के लिए दिल्ली में 21 कॉलोनीज बनाई थी। लेकिन 1975 में यह बंद होने के कगार पर पहुंच गई थी।
डीएलएफ को बुलंदियों पर पहुंचाया
केपी सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि लोगों से जमीन कैसे खरीदी जाए क्योंकि उनके पास इसके लिए पैसे नहीं थे। वह लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब रहे और उन्होंने डीएलएफ को बुलंदियों पर पहुंचा दिया। उनका कहना है कि इस काम में उन्हें सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली। उन्होंने डीएलएफ को दिल्ली की सीमा से बाहर निकाला। गुरुग्राम में कंपनी ने कई प्रोजेक्ट्स बनाए हैं। साल 2020 में केपी सिंह ने डीएलएफ के चेयरमैन की कुर्सी छोड़ दी। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स के मुताबिक केपी सिंह की नेटवर्थ 11.2 अरब डॉलर है। वह दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में 184वें और भारतीय अमीरों में 14वें नंबर पर हैं। इसके साथ ही वह देश के सबसे अमीर रियल एस्टेट कारोबारी हैं।हाल में केपी सिंह उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने अपनी निजी जिंदगी के बारे में एक बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने बताया कि उन्हें एक नई पार्टनर मिल गई है। उन्होंने कहा कि मैं बहुत खुशकिस्मत वाला हूं कि मुझे इस उम्र में एक नई पार्टनर मिल गई है। उसका नाम शीना है। वो मेरी जिंदगी के सबसे अच्छे लोगों में से एक है। वो मुझे प्रेरित करती है। हर कदम पर मेरा साथ देती है। केपी सिंह ने कहा कि शीना अब मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। केपी सिंह की पत्नी की साल 2018 में कैंसर से मौत हो गई थी।











