नई दिल्ली : Mutual Fund स्कीम कई लोगों के निवेश पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा होती हैं। लिहाजा कई सारे कर्जदाता बढ़-चढ़ कर इसके बदले लोन की पेशकश कर रहे हैं। इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक ओर जहां कर्जदाताओं ने ऐसे लोन तक पहुंचने की प्रक्रिया को आसान बना दिया है। वहीं, पर्सनल या गोल्ड लोन की तुलना में इसके इटरेस्ट रेट को भी कम रखा है। पब्लिक और प्राइवेट बैंक से यह लोन लिया जा सकता है लेकिन गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियां (NBFC) इस मोर्चे पर कहीं ज्यादा आक्रामक रही हैं। इस लोन का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए आपको मुनाफा देने वाली अपनी स्कीम को नहीं रोकना पड़ता है।
स्कीम की वैल्यू का अधिकतम 50% तक कर्ज
इक्विटी म्यूचुअल फंड के मामले में, स्कीम की वैल्यू का अधिकतम 50% तक कर्ज मिल सकता है। NBFC आपके क्रेडिट स्कोर के आधार पर इस लोन के लिए 9-10% इंटरेस्ट लेते हैं। इसकी तुलना में, गोल्ड के एवज में लिए जाने वाले लोन की दरें 9-24% हैं, जबकि लोगों को पर्सनल लोन के लिए 10-18% का भुगतान करना पड़ता है। म्यूचुअल फंड के बदले लिए जाने वाले ज्यादातर लोन की अवधि 12 महीने होती है और कर्ज की न्यूनतम रकम आम तौर पर ₹10,000 रुपये और इसकी ऊपरी सीमा ₹एक करोड़ रुपये होती है।
मिराए असेट फाइनैंशल सर्विसेज के CEO कृष्ण कन्हैया ने कहा, 'हमने देखा है कि कई बार इन्वेस्टर शॉर्ट टर्म इमरजेंसी को पूरा करने के लिए अपनी इक्विटी म्यूचुअल फंड यूनिट को बेच देते हैं। इसकी वजह से वे अक्सर इक्विटी से उचित रिटर्न नहीं कमा पाते हैं और अपने लॉन्ग टर्म लक्ष्यों तक पहुंचने से चूक जाते हैं।'
मिराए असेट फाइनैंशल सर्विसेज के CEO कृष्ण कन्हैया ने कहा, 'हमने देखा है कि कई बार इन्वेस्टर शॉर्ट टर्म इमरजेंसी को पूरा करने के लिए अपनी इक्विटी म्यूचुअल फंड यूनिट को बेच देते हैं। इसकी वजह से वे अक्सर इक्विटी से उचित रिटर्न नहीं कमा पाते हैं और अपने लॉन्ग टर्म लक्ष्यों तक पहुंचने से चूक जाते हैं।'











