क्यों हुआ भारत में ब्रिटिश राज का पतन
प्रिंस तुर्की अल-फैसल किसी समय में सऊदी इंटेलीजेंस के मुखिया भी रहे हैं। उन्होंने कहा, 'सैन्य कब्जे वाले सभी लोगों को कब्जे का विरोध करने का अधिकार है, यहां तक कि बहुत ही आक्रामक तौर पर। मैं फिलिस्तीन में सैन्य विकल्प का समर्थन नहीं करता। मैं असैन्य विद्रोह और अवज्ञा को प्राथमिकता देता हूं। यही वह वजह थी जिससे भारत में ब्रिटिश साम्राज्य और पूर्वी यूरोप में सोवियत संघ का पतन हो गया था। मैं हमास और इजरायल सरकार की कार्रवाइयों की निंदा करता हूं। इस संघर्ष में कोई नायक नहीं हैं, सिर्फ पीड़ित हैं। तुर्की अल फैसल इस समय सऊदी के सीनियर ऑफिसर हैं।
प्रिंस तुर्की अल-फैसल किसी समय में सऊदी इंटेलीजेंस के मुखिया भी रहे हैं। उन्होंने कहा, 'सैन्य कब्जे वाले सभी लोगों को कब्जे का विरोध करने का अधिकार है, यहां तक कि बहुत ही आक्रामक तौर पर। मैं फिलिस्तीन में सैन्य विकल्प का समर्थन नहीं करता। मैं असैन्य विद्रोह और अवज्ञा को प्राथमिकता देता हूं। यही वह वजह थी जिससे भारत में ब्रिटिश साम्राज्य और पूर्वी यूरोप में सोवियत संघ का पतन हो गया था। मैं हमास और इजरायल सरकार की कार्रवाइयों की निंदा करता हूं। इस संघर्ष में कोई नायक नहीं हैं, सिर्फ पीड़ित हैं। तुर्की अल फैसल इस समय सऊदी के सीनियर ऑफिसर हैं।
हमास के हमले से मिला बहाना
उन्होंने ये बातें अमेरिका में बेकर इंस्टीट्यूट में अपने संबोधन के दौरान कहीं हैं जो पिछले हफ्ते उन्होंने दिया था। फैसल ने कहा, 'मैं हमास द्वारा नागरिकों को निशाना बनाए जाने की स्पष्ट रूप से निंदा करता हूं। इस तरह का निशाना हमास के इस्लामी पहचान के दावों को झुठलाता है।' उन्होंने कहा कि इस्लाम युद्ध की स्थिति में भी निर्दोष नागरिकों, बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को निशाना बनाने पर रोक लगाता है।' सऊदी राजकुमार ने कहा, हमास के हमले ने इजरायल की सरकार को उच्च नैतिक आधार दिया है। हालांकि इसे एकमत से खारिज कर दिया गया है।उनका कहना था कि हमास के हमले ने इजरायली सरकार को गाजा से नागरिकों को खत्म करने और उन पर बमबारी करने का बहाना भी दिया है।
हमले से शांति प्रक्रिया पटरी से उतरी
फैसल का कहना था कि हमास की वजह से इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के सऊदी अरब के प्रयास को नुकसान पहुंचा है। सऊदी नेता का कहना था कि हमास का हमला बेवजह था और उन्होंने पश्चिमी देशों की भी निंदा की। उन्होंने पूछा, 'इजरायल ने तीन-चौथाई सदी में फिलिस्तीनी लोगों के साथ जो किया है, उसे ज्यादा उकसावे की क्या जरूरत है।' उन्होंने कहा कि इजरायली सेना फिलिस्तीनियों को निशाना बनाकर मार रही है, नागरिकों को जेल में डाल रही है और फिलिस्तीनी की जमीन पर कब्जा कर रही है।
उन्होंने ये बातें अमेरिका में बेकर इंस्टीट्यूट में अपने संबोधन के दौरान कहीं हैं जो पिछले हफ्ते उन्होंने दिया था। फैसल ने कहा, 'मैं हमास द्वारा नागरिकों को निशाना बनाए जाने की स्पष्ट रूप से निंदा करता हूं। इस तरह का निशाना हमास के इस्लामी पहचान के दावों को झुठलाता है।' उन्होंने कहा कि इस्लाम युद्ध की स्थिति में भी निर्दोष नागरिकों, बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को निशाना बनाने पर रोक लगाता है।' सऊदी राजकुमार ने कहा, हमास के हमले ने इजरायल की सरकार को उच्च नैतिक आधार दिया है। हालांकि इसे एकमत से खारिज कर दिया गया है।उनका कहना था कि हमास के हमले ने इजरायली सरकार को गाजा से नागरिकों को खत्म करने और उन पर बमबारी करने का बहाना भी दिया है।
हमले से शांति प्रक्रिया पटरी से उतरी
फैसल का कहना था कि हमास की वजह से इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के सऊदी अरब के प्रयास को नुकसान पहुंचा है। सऊदी नेता का कहना था कि हमास का हमला बेवजह था और उन्होंने पश्चिमी देशों की भी निंदा की। उन्होंने पूछा, 'इजरायल ने तीन-चौथाई सदी में फिलिस्तीनी लोगों के साथ जो किया है, उसे ज्यादा उकसावे की क्या जरूरत है।' उन्होंने कहा कि इजरायली सेना फिलिस्तीनियों को निशाना बनाकर मार रही है, नागरिकों को जेल में डाल रही है और फिलिस्तीनी की जमीन पर कब्जा कर रही है।
प्रिंस तुर्की ने फिलिस्तीनियों द्वारा इजरायलियों को मारे जाने पर आंसू बहाने के लिए पश्चिमी राजनेताओं की भी निंदा की। फैसल के स्पष्ट भाषण को स्थिति पर सऊदी नेतृत्व की सोच का अब तक का सबसे स्पष्ट संकेतक माना जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, सऊदी अरब के शासक हमास को अच्छी नजर से नहीं देखते हैं। वास्तव में, क्षेत्र की कई सरकारें इस भावना से सहमत हैं।











