'भारत भाग्य विधाता' की एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम स्टोरी में युवा हिंदू महिलाओं पर निशाना साधते हुए लिखा है, 'सबसे चौंकाने वाला व्यवहार युवा हिंदू महिलाओं का है, जो उस आजादी को कमाए बिना स्वतंत्र करियर वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं। सच में स्वतंत्र महिलाएं बागी फैसले लेती हैं और बेबाक राय रखती हैं। वे लीक से हटकर करियर चुनती हैं और अपने कामों की जिम्मेदारी खुद लेती हैं, क्योंकि वे अपने दम पर होती हैं। वे ऐसा अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर नहीं करतीं।'
कंगना रनौत बोलीं- Gen Z हिंदू लड़कियां बदसूरत और भ्रष्ट, कइयों संग शारीरिक संबंध को मानती हैं आजादी
कंगना रनौत पहले दिन से ही कॉकरोच जनता पार्टी और छात्र आंदोलन के खिलाफ रही हैं। अब जब NEET पेपर लीक के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है और मोदी सरकार बैकफुट पर है, तो अभिनेत्री से राजनेता बनीं बीजेपी सांसद कंगना रनौत का पारा सातवें आसमान पर है। एक्ट्रेस ने अपनी नई इंस्टाग्राम स्टोरी में Gen Z के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और विवादास्पद टिप्पणी की है। कंगना ने 'युवा हिंदू महिलाओं' पर हमला करते हुए उन्हें 'बदसूरत और भ्रष्ट' बताया है। यही नहीं, उन्होंने इस युवा पीढ़ी को 'गटर' कहते हुए 'ड्रग्स लेने, शराब पीने और कई लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाने' का आरोप लगाया है।
'भारत भाग्य विधाता' की एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम स्टोरी में युवा हिंदू महिलाओं पर निशाना साधते हुए लिखा है, 'सबसे चौंकाने वाला व्यवहार युवा हिंदू महिलाओं का है, जो उस आजादी को कमाए बिना स्वतंत्र करियर वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं। सच में स्वतंत्र महिलाएं बागी फैसले लेती हैं और बेबाक राय रखती हैं। वे लीक से हटकर करियर चुनती हैं और अपने कामों की जिम्मेदारी खुद लेती हैं, क्योंकि वे अपने दम पर होती हैं। वे ऐसा अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर नहीं करतीं।'
'भारत भाग्य विधाता' की एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम स्टोरी में युवा हिंदू महिलाओं पर निशाना साधते हुए लिखा है, 'सबसे चौंकाने वाला व्यवहार युवा हिंदू महिलाओं का है, जो उस आजादी को कमाए बिना स्वतंत्र करियर वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं। सच में स्वतंत्र महिलाएं बागी फैसले लेती हैं और बेबाक राय रखती हैं। वे लीक से हटकर करियर चुनती हैं और अपने कामों की जिम्मेदारी खुद लेती हैं, क्योंकि वे अपने दम पर होती हैं। वे ऐसा अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर नहीं करतीं।'
