वाशिंगटन: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अब अपने नाटो सहयोगियों के निशाने पर हैं। सदस्य देशों का मानना है कनाडा नाटो को कमजोर कर रहा है। इससे नाटो के सहयोगियों में लगातार गुस्सा बढ़ रहा है। नाटो के 12 संस्थापक देशों में से एक कनाडा ने सैन्य खर्च के लक्ष्य को पूरा नहीं किया है। इसके साथ ही उसने नए उपकरणों में पर्याप्त निवेश भी नहीं किया है। इसके चलते नाटो की उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं। नाटो के सदस्य इसी सप्ताह वाशिंगटन में मिलने वाले हैं, जहां कनाडा की कम होती रक्षा भागीदारी का मुद्दा गरमाया रहेगा।
उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक में नाटो के सदस्य कनाडा पर अधिक धन देने के लिए दबाव डालेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के पूर्व हथियार नियंत्रण अधिकारी मैक्स बर्गमैन ने पोलिटिको को बताया कि 'यह बिल्कुल साफ है कि जब हर कोई अधिक खर्च कर रहा है, कनाडा कोशिश भी नहीं कर रहा है।' अमेरिकी कांग्रेस के एक अधिकारी का कहना है कि 'यूरोपी देश निराश हैं कि उनकी आलोचना की जा रही है, जबकि कनाडा पर वाशिंगटन दबाव नहीं बना रहा है।'
नाटो की जड़ काटने में जुटे हैं जस्टिन ट्रूडो, कनाडा के डबल गेम से अमेरिका का चढ़ा पारा, वाशिंगटन में लगेगी क्लास











