बहुत हैंडसम दिखते थे जेआरडी टाटा जब सुधा मूर्ति ने लिखा टाटा को खत, बड़ा प्यारा है यह किस्सा

बहुत हैंडसम दिखते थे जेआरडी टाटा जब सुधा मूर्ति ने लिखा टाटा को खत, बड़ा प्यारा है यह किस्सा
नई दिल्ली : 'जेआरडी टाटा बहुत हैंडसम दिखते थे।' ब्रिटेन के पीएम की सास, इन्फोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति की वाइफ और इन्फोसिस फाउंडेशन की अध्यक्ष सुधा मूर्ति ने हाल ही में द कपिल शर्मा शो में यह बात कही थी। आज जेआरडी टाटा (JRD Tata) यानी जहांगीर रतनजी दादाभाई की आज 119वीं जयंती है। जेआरडी टाटा से जुड़े कई दिलचस्प किस्से हैं। एक किस्सा सुधा मूर्ति (Sudha Murty) से जुड़ा हुआ भी है। इसमें मूर्ति जेआरडी टाटा से गुस्सा हो जाती है और उन्हें एक खत लिखती है। फिर यह खत टाटा ग्रुप में एक नए बदलाव का कारण बनता है। आइए इस किस्से के बार में जानते हैं।

​टेल्को का नोटिस को देखकर आया गुस्सा

सुधा मूर्ति ने द कपिल शर्मा शो में बताया था, '1974 में, मैं बेंगलरु में टाटा इंस्टीट्यूट से एमटेक कर रही थी। मैं अपनी क्लास में अकेली लड़की थी। मैंने बीई किया था 1972 में। उस साल भी पूरी यूनिवर्सिटी में मैं अकेली लड़की थी। बाकी सब लड़के थे। मुझे अमेरिका में स्कॉलरशिप मिल रहा था पीएचडी करने के लिए। मैं हॉस्टल को आ रही थी। तभी मुझे नोटिस बोर्ड पर एक विज्ञापन मिला। टेल्को पुणे और जमशेदपुर में इंजीनियर ढूंढ रही थी। लेकिन नीचे लिखा था- लेडीज स्टूडेंट्स नीड नोट अप्लाई। जैसे सिगरेट के पैकेट पर लिखा होता है कि सिगरेट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ऐसे ही यह डिस्क्लेमर लिखा था। मुझे बहुत गुस्सा आ गया। मैं 22-23 साल की थी। गुस्सा उस समय ज्यादा आता था, आजकल नहीं। उस नोटिस को पढने के बाद में हॉस्टल गई और एक पोस्टकार्ड लिया।'

​जेआरडी टाटा बहुत हैंडसम थे

मूर्ति ने बताया, 'जेआरडी टाटा हमारे इंस्टीट्यूट में हर साल आते थे। मैं बहुत दूर से उनको देखती थी। हम स्टूडेंट्स थे। मिडिल क्लास फैमिली बैकग्राउंड था। ऐसे बड़े-बड़े लोगों को नजदीक से जाकर बोलने की हिम्मत नहीं थी। और जेआरडी टाटा बहुत हैंडसम थे। मैंने लेटर में उनको लिखा- सर जेआरडी टाटा, जब देश आजाद नहीं था, तब आपका ग्रुप शुरू हुआ था। आपका ग्रुप केमिकल, लोकोमोटिव और आयरन एंड स्टील इंडस्ट्री में काम करता था। आप हमेशा समय से आगे की सोचते थे। और समाज में महिला और पुरुष दोनों बराबर होते हैं। महिलाओं को अगर आप चांस नहीं दे रहे हैं, तो आप महिलाओं की सेवाओं से वंचित रह रहे हैं। इसका मतलब है कि आपका देश प्रोग्रेस नहीं कर पाएगा।'

नहीं पता था टाटा का एड्रेस

सुधा मूर्ति बताती हैं, 'कभी महिलाओं को एजुकेशन नहीं है। कभी उनको जॉब अपॉर्च्यूनिटी नहीं है। तो ऐसा कंट्री और ऐसा समाज कभी ऊपर नहीं आता है। यह आपकी कंपनी की गलती है कि आप महिलाओं को मौके नहीं दे रहे हैं। ऐसे मैंने लिख दिया। लेकिन उनका एड्रेस मुझे मालूम नहीं था। हम हुबली के हैं। उन दिनों में इंटरनेट भी नहीं था। फिर मैंने सोचा कि किसने यह लिखा है लेडीज स्टूडेंट नीड नोट टू अप्लाई.. टेल्को कंपनी ना! ओके, तो मैंने जेआरडी टाटा, टेल्को बॉम्बे... इतना लिखकर ही पोस्टकार्ड पोस्ट कर दिया।'

जेआरडी टाटा को आ गया गुस्सा

मूर्ति ने बताया, 'जेआरडी तो काफी बड़ी हस्ती थे। उनको वो पोस्टकार्ड मिला। वह पढ़ने के बाद उनको गुस्सा आ गया। उन्होंने स्टाफ को बुलाया और कहा- एक लड़की यह पूछ रही है और यह अन्याय है। उसको एक चांस देना चाहिए। उसने अच्छा नहीं किया तो हम फेल कर देंगे। उस समय मैं लेडीज हॉस्टल में थी। वहां फोन नहीं होता था, क्योंकि बॉयज लोगों से फिर लड़कियां फोन करती थीं। लेकिन बिना टेलीफोन भी पत्र लिख सकते हैं ना (हंसते हुए)। एनीवे, हमें एक टेलीग्राम मिला। प्लीज अटेंड टेल्को फाइनल इंटरव्यू इन पुणे एट अवर एक्सपेंस फर्स्ट क्लास ट्रेन टिकट। पुणे और बेंगलुरु में प्लेन नहीं था उस समय। वह 1974 की बात थी। 50 साल हो गया ना। मेरी सहेलियां थीं, सब पीएचडी करती थीं। उन्होंने कहा आप जाइए। पुणे में साड़ी बहुत अच्छी मिलती है। हम सब 30 रुपये इकट्ठे करते हैं और एक साड़ी मुफ्त में देते हैं आपको। मैं वहां गई। मैं टेक्निकली बहुत-बहुत अच्छी हूं। मैंने सारे टेक्निकल सवालों के जवाब दिए।

तब मैंने पूछा- वाई आर यू नोट टेकिंग वुमन? तब उन्होंने कहा- बेटा प्लीज अंडरस्टेंड, तुम बहुत अच्छी इंजीनियर हो। लेकिन हमारा एक प्लांट जमशेदपुर में है और एक प्लांट पुणे में है। अभी तक एक भी लड़की ने जॉइन नहीं किया है। वहां शिफ्ट में काम होता है। मर्दों के साथ काम करना होता है और आप अकेले होते हैं। नहीं तो आप आरएंडडी या फिर पीएचडी में बराबर काम कर सकते हैं। मैंने बताया कि मेरे नानाजी इतिहास के टीचर थे। उन्होंने कहा था कि 10 हजार कदमों की यात्रा हमेशा एक कदम से शुरू होती है। इसीलिए हमने बोला कि अगर आप ऐसे ही सोचते रहेंगे तो इस दुनिया में कभी भी लड़कियां आगे नहीं आ पाएंगी। एक ना एक दिन तो उन्हें आगे आना ही होगा और आपको यह शुरू करना चाहिए। फिर मुझे जॉब मिल गई।'

जब जेआरडी को हुई सुधा के लिए चिंता

सुधा मूर्ति इस किस्से के आठ साल बाद एक दिन बॉम्बे हाउज की सीढ़ियों पर जेआरडी के सामने पड़ गईं। सुधा मूर्ति अकेली थीं। जेआरडी इस बात से परेशान हुए कि वो अकेली हैं, उनके पति उन्हें लेने नहीं आए हैं और रात हो रही थी। इसके बाद जेआरडी टाटा तब तक उनके साथ खड़े होकर उनसे बतियाते रहे जब तक उनके पति नारायणमूर्ति उन्हें लेने नहीं आ गए।
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