सतीश कुमार की शव यात्रा में शामिल हुए निशांत
निशांत कुमार ने सामाजिक और राजनीतिक भूमिका निभानी शुरू कर दी। साम्यवाद से समाजवादी राजनीति की ओर बढ़े नेता सतीश कुमार की शव यात्रा में शामिल होकर निशांत कुमार ने न केवल पिता नीतीश कुमार की जिम्मेदारी निभाई बल्कि एक कुशल राजनीतिज्ञ सतीश कुमार के प्रति अपनी श्रद्धा भी दिखाई। निशांत ने सतीश कुमार का अंतिम दर्शन किया और साथ ही परिजनों से मिलकर उनकों ढांढस भी बंधाया।सतीश कुमार और नीतीश कुमार दोनों ही एक दौर में बेहद करीबी रहे थे। दोनों के बीच सियासी तौर पर काफी नजदीकियां रही थी। लालू यादव के सत्ता के खिलाफ बिगुल फूंकने में दोनों साथ-साथ थे। ऐसे में नीतीश कुमार के परिवार से सतीश कुमार की नजदीकियां रही। सतीश कुमार ने 12 फरवरी 1994 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में कुर्मी चेतना महारैली का आयोजन किया था। उस रैली में नीतीश कुमार भी शामिल हुए थे। लालू प्रसाद से अलग होने के बाद नीतीश ने इसी रैली के माध्यम से बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर किया था ।
निशांत ने युवा विधायकों के साथ की बैठक
राजनीति के प्रति रुचि का प्रदर्शन तो उसी दिन हो गया, जब जनता दल (यू) की सदस्यता ग्रहण करने के पहले जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर युवा विधायकों के साथ निशांत कुमार ने विचारों का आदान-प्रदान किया। तब एक सवाल भी उठा था कि निशांत कुमार अभी किस हैसियत से दो दर्जन युवा विधायकों की बैठक ली। बहरहाल, उस बैठक से जो बाते छनकर कर आई, वो ये कि बिहार के संदर्भ में बातचीत हुई। ताकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाया जाए।उधर, आनन फानन में जेडीयू विधायक रुहेल रंजन के घर पर 14 युवा विधायकों ने एकमत होकर निशांत कुमार को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की वकालत की। मीटिंग में शामिल विधायकों ने खुद को टीम निशांत बताते हुए कहा कि वे भविष्य में निशांत कुमार की लीडरशिप में काम करना चाहते हैं। ये नीतीश कुमार की राजनीति का ही हिस्सा रहा होगा कि निशांत के नाम से युवा विधायकों की टीम बने जो उनके सपोर्ट में रह कर निशांत की राजनीतिक चेतना को जागृत रख सके।











