सेबी ने अगस्त में जारी किया था सर्कुलर
शेयर मार्केट नियामक सेबी ने अगस्त में आईपीओ लिस्टिंग की समय सीमा घटाने का सर्कुलर जारी किया था। इसके बाद कुछ कंपनियों ने स्वेच्छा से T+3 नियम का पालन भी किया। हालांकि, अब यह अनिवार्य हो गया है। यानी कंपनी को आईपीओ लाने के 3 दिन में शेयर की लिस्टिंग करानी होगी। इससे निवेशकों के लिए उनकी रकम का लॉक-इन पीरियड भी घट जाएगा।
निवेशकों को होगा फायदा
आईपीओ की लिस्टिंग की समय सीमा घटने से ना सिर्फ निवेशकों को बल्कि इश्यू जारी करने वालों को भी फायदा होगा। इस नियम से इश्यू जारीकर्ता ने जो फंड जुटाया है, वह उसे जल्दी ही मिल सकेगा। इससे कंपनी को कम समय में आईपीओ से जुटाई गई पूंजी मिल जाएगी। इसके अलावा निवेशकों को आईपीओ में शेयर आवंटित नहीं होने की स्थिति में जल्द ही अपनी रकम वापस मिल जाएगी। साथ ही निवेशकों को लिस्टिंग गेन के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
पहले स्वैच्छिक था यह नियम
सेबी ने आईपीओ लिस्टिंग की समयसीमा घटाने का नियम 1 सितंबर 2023 से ही लागू कर दिया था। हालांकि, तब से यह नियम वॉलेंटरी था। सर्कुलर के मुताबिक, 1 सितंबर के बाद खुलने वाले सभी आईपीओ के लिए यह वॉलंटरी तौर पर लागू हो गया था। हाल में आए 5 आईपीओ में से 4 कंपनियों (इरेडा, टाटा टेक, गांधार ऑयल और फेडबैंक फाइनेंशियल सर्विसेज) की लिस्टिंग T+3 के आधार पर हुई थी। जबकि फ्लेयर राइटिंग के आईपीओ की लिस्टंग T+6 नियम के अनुसार हुई।











