निगमायुक्त के बजाय महापौर के पास पहुंच रहीं दो करोड़ के विकास कार्यों की फाइलें

निगमायुक्त के बजाय महापौर के पास पहुंच रहीं दो करोड़ के विकास कार्यों की फाइलें
भोपाल। नगर निगम द्वारा विकास कार्य कराने के लिए दो करोड़ तक के कामों की फाइलें अब तक आयुक्त से के तहत हो जाती थी। इस बजट सत्र से इस तरह के मद की फाइलों को नगर निगम अधिकारियों द्वारा महापौर के पास भेजा जा रहा है। महापौर ऐसी फाइलों पर जल्दी कोई निर्णय नहीं ले रहीं, जिससे विकास के कामों में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।

ऐसा ही मामला वार्ड 34 का सामने आया। यहां निर्दलीय पार्षद पप्पू विलास राव घाडग़े ने नगर निगम द्वारा स्वीकृति बजट के अनुसार 5 फाइल जनसमस्याओं के निदान के लिए बनाकर एक सप्ताह पूर्व भेजी थी। फाइलों की स्वीकृति न होने पर जब उन्होंने जोन के क्लर्क से इस विषय में जानकारी प्राप्त की तो ज्ञात हुआ कि अब विकास कार्यों की फाइलें पहले महापौर के पास जाएंगी और पार्षद कोटे की भी फाइल को वो अगर अनुमति देती हे तो उस फ़ाइल का ही बजट बुक होगा। अन्यथा फाइल वापस हो जाएगी।
स्थानीय पार्षद पप्पू विलास का कहना है कि जब विकास कार्यों में 2 करोड़ रुपये की स्वीकृति के अधिकार आयुक्त को राज्य शासन द्वारा दिये गये हैं, तो महापौर किस अधिकार से विकास कार्यों की फाइल अपने पास मंगा रही हैं।

उन्होंने कहा कि जो पूर्व में परंपरा रही है कि सिविल इंजीनियर विकास कार्य की फाइल बनाते हैं। वह मुख्यालय से बजट बुक होने के बाद ओडीसी से स्वीकृत होकर टेंडर की प्रक्रिया में से निकाल कर विकासकार्य हो जाते थे। पार्षद का कहना है कि कुछ दिनों बाद ही बारिश का मौसम आरंभ होगा, इसके पूर्व वार्ड में सड़क और नालियों के निर्माण कार्य पूरे कराना है, लेकिन विकास कार्यों की फाइलों की स्वीकृति के सिस्टम को बदलकर इसमें विलंब किया जा रहा है।
निर्दलीय पार्षद पप्पू विलास का कहना है कि वर्तमान परिषद में एक तिहाई भाजपा पार्षदों और महापौर को सर्वाधिक मतों से भोपाल की जनता में चुना, लेकिन जनहित के कामों में नए नियम लागू कर जनता को परेशानी में डाला जा रहा है। महापौर द्वारा 2 करोड़ के बजट की फाइलों को अपने पास बुलाकर आयुक्त के अधिकारों का भी हनन किया जा रहा है।

Advertisement