पर्सनल लॉ की जगह एक कानून
संविधान की धारा 44 में यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र किया गया है। देश में रहने वाले तमाम लोगों के लिए समान नागरिक संहिता की चर्चा की गई है। संविधान के इसी प्रावधान के आधार पर धामी सरकार की ओर से यूनिफॉर्म सिविल कोड का प्रस्ताव तैयार किया गया है। ड्राफ्ट प्रपोजल के मिलने के बाद इसे धामी सरकार कैबिनेट की बैठक में रख सकती है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी जाएगी।
यूनिफॉर्म सिविल कोड के प्रावधानों को लेकर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुस्लिम लड़कियों को भी उत्तराधिकार मिल सकता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ में मुस्लिम लड़कियों को पैत्रिक संपत्ति में अधिकार का प्रावधान नहीं है। हालांकि, उत्तराखंड सरकार की ओर से तैयार कराए गए ड्राफ्ट में लड़कियों और बच्चों को लेकर कई प्रावधान किए जाने की बात कही जा रही है। उत्तराधिकार के मसले यह पर भी तय किया गया है कि अब गोद लिए बच्चे भी उत्तराधिकारी बन सकेंगे। मुस्लिम और पारसी समाज में इस प्रकार की व्यवस्था अभी नहीं है। समान नागरिक संहिता के तहत हिंदू समाज की तरह उन्हें भी इस नियम के दायरे में लाया जा सकता है।
मुस्लिमों में भी लड़की को अधिकार
यूनिफॉर्म सिविल कोड के प्रावधानों को लेकर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुस्लिम लड़कियों को भी उत्तराधिकार मिल सकता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ में मुस्लिम लड़कियों को पैत्रिक संपत्ति में अधिकार का प्रावधान नहीं है। हालांकि, उत्तराखंड सरकार की ओर से तैयार कराए गए ड्राफ्ट में लड़कियों और बच्चों को लेकर कई प्रावधान किए जाने की बात कही जा रही है। उत्तराधिकार के मसले यह पर भी तय किया गया है कि अब गोद लिए बच्चे भी उत्तराधिकारी बन सकेंगे। मुस्लिम और पारसी समाज में इस प्रकार की व्यवस्था अभी नहीं है। समान नागरिक संहिता के तहत हिंदू समाज की तरह उन्हें भी इस नियम के दायरे में लाया जा सकता है।
लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र में वृद्धि का मामला लंबे समय से चल रहा है। बढ़ती आबादी को काबू में करने के लिए इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। उत्तराखंड समान नागरिक संहिता के ड्राफ्ट में इस पर भी चर्चा की बात कही जा रही है। दावा किया जा रहा है कि लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र को 18 साल से बढ़ाकर 21 साल किया जा सकता है। अभी लड़कों की शादी की उम्र 21 साल है। लड़कियों को भी उनके समान कानूनी अधिकार मिल सकता है।











