संयुक्त राष्ट्र चार्टर का बताया उल्लंघन
बलूच ने कहा, "पाकिस्तान ने पहले कहा है कि दक्षिण एशिया में दशकों से मौजूद भारत का जासूसी नेटवर्क कई महाद्वीपों तक फैल गया है और अब यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय है।" बलूच ने कहा कि "इस तरह की कार्रवाइयां अवैध हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के साथ ही न्याय के बुनियादी सिद्धांतों और उचित प्रक्रिया का उल्लंघन हैं।"अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लगाई गुहार
बलूच ने कहा, "हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह करते हैं कि वह भारत को उसके अवैध कृत्यों और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए विदेशों में की जा रही कार्रवाइयों के लिए जिम्मेदार ठहराए।" दरअसल, पिछले महीने ही ब्रिटिश अखबार गार्डियन ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि पिछले 3 सालों में पाकिस्तान में कम से कम 20 भारत विरोधी आतंकियों की हत्या की गई। अखबार ने इसके पीछे भारतीय खुफिया एजेंसियों के एजेंट का हाथ बताया था। हालांकि, इस बारे में कोई सबूत नहीं दिए गए थे।रिपोर्ट आने के बाद पाकिस्तान की बहुत बदनामी हुई थी। पाकिस्तान की सरकार और एजेंसियों को वहां की जनता ने ही आड़े हाथों लिया था, जिसके बाद से पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ था। अब अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट और ऑस्ट्रेलिया में कथित भारतीय जासूसी नेटवर्क की खबरों ने उसे एक बार फिर भारत के खिलाफ प्रोपेगैंडा फैलाने का मौका दे दिया है। अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट में खालिस्तानी आतंकी पन्नू की हत्या की कथित साजिश में कथित तौर पर भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के अधिकारी का नाम लिया था। इस रिपोर्ट को भारत ने गलत बताते हुए सख्ती से खारिज किया था।











