डिफेंस इन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का अपना पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट एएमसीए हासिल करना देश की बढ़ती रक्षा महत्वाकांक्षाओं का प्रमाण है। स्वदेशी रूप से डिजाइन यह विमान स्टील्थ तकनीक, सुपरक्रूज और उन्नत हथियार जैसी अत्याधुनिक क्षमताओं से लैस है लेकिन ये प्रोजेक्ट समय से नहीं चल रहा है।
एएमसीए में लग सकते हैं छह से सात साल
चीन ने चेंगदू जे-20 तैनात कर दिया है और एफसी-31 जैसे उन्नत लड़ाकू जेट विकसित कर रहा है। पाकिस्तान भी चीन के सहयोग से अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हासिल कर रहा है। इस परिदृश्य ने भारत को अपने विकल्पों पर फिर सोचने और अपनी हवाई श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त समाधानों पर विचार करने को प्रेरित किया है।
एएमसीए प्रोजेक्ट में देरी को देखते हुए भारत के लिए सबसे बेहतर समाधान के तौर पर रूस के सुखोई Su-57 फाइटर जेट का अधिग्रहण नजर आ रहा है। भारत को शुरू में इस जेट के इंजन और तकनीकी पहलुओं के बारे में चिंता थी लेकिन हाल के समय में ये दिक्कत दूर हुई है। विशेष रूप से इजडेली 30 (A51) इंजन के एकीकरण ने इन मुद्दों हल किया है। यह नया इंजन Su-57 की ताकत और क्षमताओं को बढ़ाता है।
Su-57 में उन्नत रडार और कम रडार क्रॉस-सेक्शन है, जो इसे एक दुर्जेय स्टील्थ विमान बनाता है। इन सुधारों और रूसी एयरोस्पेस बलों के भीतर इसकी पूर्ण परिचालन स्थिति के साथ, Su-57 को एएमसीए को तैनाती के लिए तैयार होने तक एक शानदार विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
Su-57 की खरीद से भारत को कई फायदे होंगे। सबसे पहले तो भारतीय वायु सेना को चीन के जे-20 और दूसरे खतरों का मुकाबला करने के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट मिल जाएंगे। दूसरे Su-57 भारत के सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमानों के मौजूदा बेड़े के साथ कई समानताएं रखता है। इससे इसका रखरखाव और ट्रेनिंग भारतीय एयरफोर्स के लिए आसान होगी।
रूसी जेट बनेगा भारत के लिए विकल्प!
Su-57 में उन्नत रडार और कम रडार क्रॉस-सेक्शन है, जो इसे एक दुर्जेय स्टील्थ विमान बनाता है। इन सुधारों और रूसी एयरोस्पेस बलों के भीतर इसकी पूर्ण परिचालन स्थिति के साथ, Su-57 को एएमसीए को तैनाती के लिए तैयार होने तक एक शानदार विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
भारत के लिए क्यों होगा फायदे का सौदा?
एएमसीए भारत के रक्षा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक लक्ष्य है, वहीं Su-57 छोटे समय के लिए एक आकर्षक समाधान है। Su-57 हासिल करके भारत यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसकी वायु शक्ति मजबूत बनी रहे और क्षेत्र में उभरती चुनौतियों का सामना आसानी से कर सके। Su-57 के जरिए भारत अपने पड़ोस के बदलते भूराजनीतिक माहौल में अपनी रक्षा बढ़त बनाए रख सकता है।











