जयशंकर ने बीआरआई पर जमकर सुनाया
भारत ने 60 अरब अमेरिकी डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (बीआरआई की प्रमुख परियोजना) पर चीन का विरोध किया क्योंकि इसे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बनाया जा रहा है। बिश्केक में शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि एससीओ सदस्यों को अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का सख्ती से पालन करके, एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करके और आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहन देकर क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
अपने संबोधन में जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा 'समृद्धि का प्रवर्तक' बन सकते हैं। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा, जिसे कई लोग चीन के बीआरआई के विकल्प के रूप में देखते हैं, की संयुक्त रूप से घोषणा अमेरिका, भारत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ के नेताओं ने सितंबर में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान की थी।
भारत मध्य पूर्व गलियारे की जमकर की तारीफ
अपने संबोधन में जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा 'समृद्धि का प्रवर्तक' बन सकते हैं। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा, जिसे कई लोग चीन के बीआरआई के विकल्प के रूप में देखते हैं, की संयुक्त रूप से घोषणा अमेरिका, भारत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ के नेताओं ने सितंबर में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान की थी।
उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा का भी किया जिक्र
अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा भारत, ईरान, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल ढुलाई के लिए जहाज, रेल और सड़क मार्गों का 7,200 किलोमीटर लंबा 'मल्टी-मोड नेटवर्क' है। भारत ने इस रास्ते से सामान का सफल परिवहन कर इसकी उपयोगिता भी साबित कर दी है। इस नए रास्ते से स्वेज नहर के जरिए होने वाले व्यापार को कम किया जा सकेगा, जिससे धन और समय दोनों की बचत हो सकती है।











