पाकिस्‍तान में पीटीआई के पूर्व हिंदू सांसद माल्‍ही के पुश्‍तैनी घर पर चला बुलडोजर, इमरान का करीबी होने सजा!

पाकिस्‍तान में पीटीआई के पूर्व हिंदू सांसद माल्‍ही के पुश्‍तैनी घर पर चला बुलडोजर, इमरान का करीबी होने सजा!
कराची: सिंध के उमरकोट में पाकिस्‍तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के पूर्व सांसद और हिंदू नागरिक लाल चंद्र माल्‍ही के घर पर बुलडोजर चला दिया गया है। माल्‍ही ने इस घटना का वीडियो ट्वीट किया है और इसकी जानकारी दी है। माल्‍ही, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी हैं और इमरान ने भी वीडियो को रि-ट्वीट कर घटना की निंदा की है। माल्‍ही, सिंध क्षेत्र में पीटीआई के उपाध्‍यक्ष हैं। कुछ महीनों पहले ही उन्‍होंने राष्‍ट्रीय महासभा से इस्‍तीफा दे दिया था। वह पाकिस्‍तान की संसद में मानवाधिकार समिति के मुखिया रह चुके हैं। माल्‍ही के घर को गिराए जाने की खबरों की निंदा की जा रही है।


माल्‍ही बोले-पकिस्‍तान के कानून का मलबा

माल्‍ही ने घटना का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, 'यह मलबा पाकिस्तान में कानून के शासन का है। इमरान खान की दुश्मनी से सरकार में खलबली मची हुई है। मैं एक शांतिपूर्ण कानून का पालन करने वाला पाकिस्तानी हिंदू नागरिक हूं। पुलिस और प्रशासन ने भारी मशीनों के साथ मिलकर उमरकोट (सिंध) में मेरे परिवार की आवासीय संपत्ति को बिना किसी कानूनी औचित्य के ध्वस्त कर दिया। मेरी गलती इमरान खान और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के साथ खड़ा होना है।' माल्‍ही का जो घर गिराया गया था, वह उनका पुश्‍तैनी मकान था। माल्‍ही पीटीआई के अल्‍पसंख्‍यक विंग के मुखिया भी हैं।

पार्टी के अल्‍पसंख्‍यक शाखा के मुखिया
पीटीआई ने भी माल्ही के घर को ध्वस्त किए जाने की कड़ी निंदा की है। पीटीआई महासचिव उमर अयूब खान ने कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्‍तान की फांसीवादी सरकार और भ्रष्‍ट सिंध सरकार को नागरिकों की संपत्तियों की परवाह नहीं है। वहीं इमरान खान ने भी वीडियो को शेयर किया है। उन्‍होंने इसे शेयर करते हुए लिखा, 'मैं पीपीपी सरकार द्वारा उमरकोट में लाल मल्ही के पैतृक घर को ध्वस्त करने की कड़ी निंदा करता हूं। लाल माल्ही तहरीक-ए-इंसाफ की अल्पसंख्यक शाखा के अध्यक्ष हैं।'

'ऐसे तो नहीं होगा विकास'

इमरान के मुताबिक पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर करने के लिए अपनाई गई रणनीति ने न केवल सिर्फ लोकतंत्र को कमजोर किया है, बल्कि इससे देश और नागरिकों के बीच नागरिक समझौते को भी अपूरणीय क्षति हो रही है। उन्‍होंने सरकार से मांग की कि जो तरीके अपनाए जा रहे हैं उन पर एक बार गौर किया जाए। उन्‍होंने कहा कि नागरिकों को ज़ुल्म और फांसीवाद के तले कुचलकर और उनके बुनियादी अधिकारों को छीनकर न तो अच्छी सरकार संभव है और न ही विकास की कोई संभावना है।
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