भोपाल । मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के कामों में देरी हो रही है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 24 जिलों के 70 ब्लाकों के छह हजार गांवों में 50 किमी दूर से पानी लाने की व्यवस्था की जा रही है।
इन ब्लाकों में नदी, तालाब सहित अन्य सतही जल स्रोतों से वर्षभर आपूर्ति के लिए पर्याप्त पानी नहीं है।इन गांवों तक पानी पहुंचाने में करीब आठ से दस माह लगेंगे। इसी तरह कई जिलों के 658 गांवों के लोगों तक पानी पहुंचाने के लिए सौ किमी दूर से पानी लाना पड़ रहा है। बता दें कि प्रदेश में जल जीवन मिशन में तय लक्ष्य सवा करोड़ के मुकाबले केवल 48 प्रतिशत घरों तक ही कनेक्शन हो पाए हैं।
बता दें, वर्ष 2019 में शुरू हुए मिशन में दिसंबर, 2024 तक सवा करोड़ की आबादी तक नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। हालांकि राज्य सरकार दिसंबर, 2023 तक ही इसे पूरा करना चाहती है। देशभर में एक साथ काम शुरू होने के कारण ठेकेदारों को श्रमिक नहीं मिल रहे हैं। वहीं जलस्रोत भी नजदीक नहीं है, इसका असर परियोजनाओं पर पड़ रहा है।
सीधी, रीवा, सतना, देवास, अशोकनगर में 658 ऐसे भी गांव हैं, जहां 100 किमी दूर से पानी लाना पड़ेगा। इनमें आरोन, चांचौड़ा, राघौगढ़, देवास, सिहावल, हनुमना, मझगवां जनपद पंचायत शामिल हैं। इनमें ऐसे भी जनपद पंचायत क्षेत्र हैं, जहां दूसरे जिले से पानी लाना पड़ेगा। वर्तमान में इन गांवों में पंचायतें टैंकरों से पानी सप्लाई करती हैं।
कम दूरी के गांवों में पहले पहुंचेगा पानी
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकार अब टुकड़ों में काम कर रही है। अब उन गांवों में सबसे पहले पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है, जहां से जलस्रोत की दूरी 30 किमी या उससे कम है। इसमें एक शर्त भी है कि यह जलस्रोत स्थायी होने चाहिए। इन गांवों में पानी पहुंचाने में करीब एक साल लगेंगे। रीवा, सतना, सीधी, अशोकनगर और देवास जिले के सात ब्लाकों में सौ किमी दूर से पानी लाने के लिए पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इस पर सरकार को अन्य परियोजनाओं से ज्यादा राशि खर्च करनी पड़ रही है। इन्हें समूह परियोजनाओं के साथ ही जोड़ा गया है।
50 प्रतिशत घरों में कनेक्शन
23 जिलों में योजनाओं का काम तेजी से चल रहा है। इनमें 50 प्रतिशत घरों तक पानी पहुंच गया है। जबकि इंदौर, बुरहानपुर और निवाड़ी में 80 प्रतिशत से ज्यादा घरों में नल कनेक्शन किए जा चुके हैं, लेकिन इन गांवों में 30 से 40 प्रतिशत कनेक्शन ही सत्यापित हो पाए हैं। वहीं 12 जिले योजना में पीछे हैं। इनमें 40 प्रतिशत से कम घरों में कनेक्शन हो पाए हैं। पन्ना, सतना, सिंगरौली, छतरपुर और भिंड जिले में 30 प्रतिशत घरों में भी पानी नहीं पहुंच पाया है। इनमें सभी घरों तक पानी पहुंचाने में करीब दो वर्ष लग जाएंगे।











