IIT-BHU गैंगरेप के आरोपी पोर्न एडिक्ट शिकंजा कसा तब डिलीट किया छात्रा का न्यूड वीडियो फारेंसिक टीम रिकवर करेगी डेटा

IIT-BHU गैंगरेप के आरोपी पोर्न एडिक्ट शिकंजा कसा तब डिलीट किया छात्रा का न्यूड वीडियो फारेंसिक टीम रिकवर करेगी डेटा

IIT-BHU गैंगरेप के आरोपियों कुणाल, आनंद उर्फ अभिषेक और सक्षम को जेल भेजने के बाद पुलिस अब चार्जशीट तैयार कर रही है। इस बीच, छानबीन में सामने आया कि तीनों पोर्न एडिक्ट हैं। उनके मोबाइल में पोर्न वीडियो और हिस्ट्री में पोर्न वेबसाइट्स के लिंक मिले हैं।

फोन के बैकअप में भी कई पोर्न वीडियो और अश्लील तस्वीरें मिली हैं। यह भी सामने आया कि गैंगरेप की वारदात को अंजाम देने के बाद सभी मध्य प्रदेश चले गए। लेकिन जब पुलिस का दबाव बढ़ा, तब तीनों ने अपने-अपने मोबाइल से बीएचयू की छात्रा का वीडियो डिलीट कर दी थी। पुलिस का मानना है कि डेटा रिकवर हो जाएगा। इसलिए तीनों के मोबाइल फोन फॉरेंसिंक जांच के लिए भेज दिए गए हैं।

पोर्न वीडियो में दिखे सीन को दोहराने की कोशिश
गैंगरेप के तीनों आरोपी वाराणसी जिला कारागार के बैरक नंबर-10 में रखे गए हैं। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, तीनों पोर्न वीडियो में दिखने वाली चीजों को बाहर अंजाम देने की कोशिश करते थे। 1 नवंबर की देर रात BHU में भी उन्होंने ऐसा ही करने का प्रयास किया।

पुलिस की माने तो BHU कैंपस में गैंगरेप और कपड़े उतरवाकर मोबाइल से न्यूड वीडियो बनाने वाले आरोपियों के करतूत की असली जड़ पोर्न वीडियो और इंटरनेट पर इसकी सर्चिंग है। आरोपी कई पोर्न वेबसाइटों पर आपत्तिजनक सामग्रियों को खंगालते थे।

पुलिस ने आरोपियों के करीबियों की लिस्ट बनाई
पुलिस चार्जशीट में आरोपियों की पूरी कुंडली शामिल कर रही है। पुलिस मोबाइल को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के तौर पर पेश करेगी। पुलिस की एक टीम BHU परिसर और आस-पास इन आरोपियों से कभी 'ईव-टीजिंग' की शिकार छात्राओं या युवतियों की तलाश कर रही है।

पुलिस अफसरों ने बताया कि इन सबूतों के आधार पर जिला जेल में तीनों आरोपियों की टीआईपी (टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड) होगी। इसके अलावा, मजिस्ट्रेट के सामने पीड़ित इनकी पहचान करेगी।

जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों आरोपियों के साथ रहने वाले कई दोस्तों ने मोबाइल फोन बंद कर लिए हैं। कई वाराणसी से बाहर चले गए हैं। पुलिस ने वारदात के बाद इन आरोपियों से बात करने वाले लोगों की एक लिस्ट बनाई है।

10 हजार मोबाइल नंबर ट्रेस करके पकड़े गए आरोपी
वारदात के 60 दिन बाद तीनों आरोपियों को कड़ी मशक्कत के बाद दबोचा जा सका। उन तक पहुंचने के लिए पुलिस की स्पेशल-40 टीम ने वारदात के बाद अगले 48 घंटे में पूरे शहर को खंगाल डाला था। BHU कैंपस से लेकर शहर के 120 मोहल्लों तक पुलिस टीम ने दस्तक दी।

शहर में लगे 300 से अधिक CCTV चेक किए। BHU से लेकर चेतगंज तक रात में एक्टिव रहे 10 हजार नंबरों को ट्रेस किया। 1000 मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए गए। इनमें से 200 सस्पेक्टेड नंबरों के कॉल डेटा रिकॉर्ड यानी CDR की जांच की गई।

5 रूट में 10 हजार मोबाइल नंबर की जांच
पुलिस अफसरों ने वारदात स्थल से निकलकर जाने वाले 5 रूट चिह्नित किए। आधी रात के बाद से सुबह 8 बजे तक 22 बेस ट्रांसीवर स्टेशन यानी BTS से 10 हजार नंबरों को चुना गया। इसमें BHU से बाहर आने-जाने वाले 1000 नंबर सर्विलांस पर लगाए गए। लगभग 50 से अधिक बुलेट सवार सीसीटीवी में बीएचयू के आसपास कैद हुए।

इनमें से कई से पुलिस ने पूछताछ की। 48 घंटे बाद पुलिस ने सर्विलांस से 200 संदिग्धों के नंबर का CDR निकाला, जिनकी लोकेशन उस रात BHU में थी। इनमें तीनों आरोपी कुणाल, सक्षम और अभिषेक के नंबर भी थे, जो हुलिया के अनुसार मैच कर रहे थे। पुलिस ने CCTV फुटेज से तीनों आरोपियों के चेहरे का मिलान कराया।

वारदात के 10वें दिन पुलिस आरोपियों तक पहुंची
पुलिस के इस एक्शन के चलते वारदात के 5वें दिन तीनों आरोपियों की फुटेज पुलिस को मिली। 7वें दिन यानी 8 नवंबर को पुलिस ने पीड़ित से तीनों आरोपियों की पहचान की। 10वें दिन तक पुलिस आरोपियों के करीब पहुंच गई। मगर तब तक आरोपी मध्य प्रदेश चुनाव के लिए जा चुके थे।

पुलिस तीनों आरोपियों को ट्रेस करते हुए मध्य प्रदेश के रीवा तक गई। वहां फुटेज से उनके चेहरे मिलाए गए। मामला हाई-प्रोफाइल था, क्योंकि तीनों आरोपी भाजपा नेताओं की सोशल मीडिया टीम से जुड़े हुए थे। इसलिए, पुलिस ने आकर सबूत जुटाए और फिर 30 दिसंबर की रात तीनों आरोपियों को पकड़ लिया।

इन आधार पर पुलिस चार्जशीट की तैयारी कर रही है...

1. विक्टिम यानी पीड़ित छात्रा
इस केस में सबसे अहम पीड़ित छात्रा है। उसने सबसे पहले फुटेज देखकर आरोपियों की पहचान की। पीड़ित का बयान भी हुआ था, जिसमें उसने गैंगरेप और मोबाइल से कपड़े उतरवाकर न्यूड वीडियो बनाने की बात कही थी।

शुरुआती FIR में कपड़े उतरवाने और वीडियो बनाने की बात थी। तब धारा 354 (बी) यानी कपड़े उतरवाना और 509 धमकी देना की धारा में केस दर्ज हुआ था। 7 नवंबर को छात्रा का बयान पुलिस ने दर्ज किया। इसके बाद 8 नवंबर को मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता के बयान हुए। बयान के आधार पर पुलिस ने गैंगरेप की धारा यानी 376 (डी) बढ़ाई थी।

2. गवाह: छात्रा का दोस्त और सिक्योरिटी गार्ड
1 नवंबर की रात हुई वारदात में पीड़ित छात्रा अपने दोस्त के साथ रात 1.30 बजे कैंपस में थी। बुलेट से आए तीनों आरोपियों ने पहले गन प्वाइंट पर छात्रा के दोस्त को वहां से धमकाकर भगा दिया था। इस केस में वह अहम गवाह है। दूसरा गवाह सिक्योरिटी गार्ड। जिसने रात में बुलेट में इन तीनों आरोपियों को देखा था।

3. सबूत: CCTV, मोबाइल लोकेशन-फॉरेंसिक रिपोर्ट और मेडिकल रिपोर्ट
पुलिस के पास इस केस में 3 अहम सबूत हैं। पहला-सीसीटीवी में तीनों आरोपी कैद हुए हैं। दूसरा-मोबाइल लोकेशन और उसकी फॉरेंसिक रिपोर्ट। तीसरा- पीड़ित की मेडिकल रिपोर्ट। पुलिस अफसरों ने बताया कि तीनों आरोपियों की पहली पहचान सीसीटीवी से ही हुई थी। वारदात के दिन पूरे रूट में कई जगह आरोपी ट्रेस हुए हैं। पीड़ित छात्रा ने भी सीसीटीवी देखकर ही आरोपियों की पहचान की थी।

वहीं, मोबाइल CDR और लोकेशन भी इस केस में बेहद अहम है। वारदात के वक्त तीनों आरोपियों की मोबाइल लोकेशन, आरोपियों के बीच बातचीत की रिकॉर्डिंग, वॉट्सऐप चैटिंग। इसके अलावा, जिस मोबाइल से पीड़ित का न्यूड वीडियो शूट किया गया है उसे भी रिकवर करके पुलिस ने फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है।

40 पुलिसकर्मियों की टीम ने खंगाला चप्पा-चप्पा
गैंगरेप के खुलासे के लिए 40 पुलिसकर्मियों की 7 टीम बनाई गई। सबको अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई। डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी ने पूरी जांच का ब्लूप्रिंट खींचा और फिर टीमों को लगाया। पुलिस की स्पेशल-40 की इस टीम में 8 पुलिसकर्मी लंका थाने, 5 पुलिसकर्मी सर्विलांस टीम, 3 पुलिसकर्मी सर्किल पुलिस, 6 पुलिसकर्मी क्राइम ब्रांच, 5 पुलिसकर्मी क्राइम टीम सर्किल, 3 पुलिसकर्मी साइबर सेल, 6 पुलिसकर्मी स्वाट और 4 अलग-अलग थानों के पुलिसकर्मी को शामिल किया गया था।

सबसे पहले टीम ने BHU के आसपास 70 CCTV फुटेज निकाली। 4 पुलिसकर्मियों को उसे देखने के लिए लगाया गया। पुलिस की एक टीम त्रिनेत्र यानी CCTV कमांड सेंटर पहुंची। वहां शहर के CCTV 20 स्क्रीन पर ऑन किए। बीएचयू कैंपस और उसके आसपास का रात का हर मूवमेंट देखा गया।

इन 300 कैमरों से पुलिस ने संदिग्धों के 110 फुटेज जुटाए। इसमें एक बुलेट पर तीनों आरोपियों का फुटेज नजर आया। उनका पता लगाया गया। वारदात यानी 1 नवंबर की रात तीनों आरोपियों के मोबाइल की लोकेशन कहां-कहां रही, किस जगह कितनी देर रुके, इसकी जांच के साथ ही रास्तों के CCTV फुटेज चेक किए गए।

वारदात वाली रात क्या हुआ था? छात्रा की FIR से जानिए...

पीड़ित ने 2 नवंबर को पुलिस को दी शिकायत में कहा था, 'मैं 1 नवंबर की रात 1:30 बजे अपने हॉस्टल से किसी जरूरी काम के लिए बाहर निकली। कैंपस के गांधी स्मृति चौराहे के पास मुझे मेरा दोस्त मिला। हम दोनों साथ में जा रहे थे कि रास्ते में कर्मन बाबा मंदिर से करीब 300 मीटर दूर पीछे से एक बुलेट आई। उस पर 3 लड़के सवार थे। उन लोगों ने बाइक खड़ी करके मुझे और मेरे दोस्त को रोक लिया।

इसके बाद उन लोगों ने हमें अलग कर दिया। मेरा मुंह दबाकर मुझे एक कोने में ले गए। वहां पहले मुझे किस किया, उसके बाद कपड़े उतरवाए। मेरा वीडियो बनाया और फोटो खींची। मैं जब बचाव के लिए चिल्लाई तो मुझे मारने की धमकी दी। करीब 10-15 मिनट तक मुझे अपने कब्जे में रखा और फिर छोड़ दिया।

मैं अपने हॉस्टल की ओर भागी तो पीछे से बाइक की आवाज आने लगी। डर के मारे मैं एक प्रोफेसर के आवास में घुस गई। वहां पर 20 मिनट तक रुकी और प्रोफेसर को आवाज दी। प्रोफेसर ने मुझे गेट तक छोड़ा। उसके बाद पार्लियामेंट सिक्योरिटी कमेटी के राहुल राठौर मुझे IIT-BHU पेट्रोलिंग गार्ड के पास लेकर पहुंचे। जहां से मैं अपने हॉस्टल तक सुरक्षित आ पाई। तीनों आरोपियों में से एक मोटा, दूसरा पतला और तीसरा मीडियम हाइट का था। जिसके आधार पर पुलिस ने CCTV फुटेज से तीनों आरोपियों के चेहरे का मिलान किया।


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