बीच या पार्क नहीं, मंदिर है यह
जगन्नाथ पुरी मंदिर प्रशासन ने कहा है कि मंदिर समुद्री तट या पार्क नहीं है, मंदिर में भगवान रहते हैं, ये कोई मनोरंजन स्थल नहीं है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के प्रमुख रंजन कुमार दास ने कहा, 'मंदिर की गरिमा और पवित्रता बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। दुर्भाग्यवश, कुछ लोग दूसरों लोगों की धार्मिक भावनाओं की परवाह किए बिना मंदिर में आ जाते हैं।'
क्या पहनकर आएं, इस पर फैसला जल्द
रंजन कुमार दास ने कहा, 'कुछ लोगों को मंदिर में फटी जीन्स, बिना आस्तीन वाले वस्त्र और हाफ पैंट पहने देखा गया मानो ये लोग समुद्री तट या पार्क में घूम रहे हों। मंदिर में भगवान रहते हैं, मंदिर मनोरंजन का कोई स्थान नहीं है।' उनके अनुसार, मंदिर में आने के लिए स्वीकृत पोशाकों पर निर्णय जल्द ही लिया जाएगा।
गेट पर पहरेदार रोकेंगे
मंदिर प्रशासन के अधिकारियों ने इसके साथ ही यह भी बताया कि मंदिर के 'सिंह द्वार' पर तैनात सुरक्षा कर्मियों और मंदिर के अंदर प्रतिहारी सेवकों को ड्रेस कोड लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने सोमवार को बताया कि मंदिर में कुछ लोगों को 'अशोभनीय' पोशाक में देखे जाने के बाद 'नीति' उप-समिति की बैठक में श्रद्धालुओं के लिए ड्रेस कोड लागू करने का निर्णय लिया गया।
ड्रेस कोड को लेकर करेंगे जागरूक
ड्रेस कोड को लेकर करेंगे जागरूक
रंजन कुमार दास ने कहा कि मंदिर प्रशासन मंगलवार से श्रद्धालुओं को 'ड्रेस कोड' के संबंध में जागरूक करेगा। दास ने कहा कि हाफ-पैंट, शॉर्ट्स, फटी जीन्स, स्कर्ट और बिना आस्तीन वाले कपड़े पहने लोगों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पवित्रता बनाए रखना कर्तव्य
मंदिर प्रशासन ने कहा कि असभ्य कपड़े पहनकर मंदिर में आना परंपरा के खिलाफ है। हमारा जगन्नाथ धाम एक पवित्र स्थान है। देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में आते थे। मंदिर की पवित्रता बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। दुर्भाग्य से, कुछ भक्त धार्मिक भावनाओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं और ऐसे कपड़ों में दर्शन के लिए आ रहे हैं।











