कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 के तहत आने वाला 'अप्राकृतिक यौन संबंध' धारा 375 (ए) में शामिल है, जैसा कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा था। हालांकि, अदालत ने 498ए (दहेज उत्पीड़न) और 323 के तहत आरोपों के लिए उसकी दोषसिद्धि और सजा की पुष्टि की।
यह है मामला
वर्ष 2013 में संजीव गुप्ता के खिलाफ उसकी पत्नी ने गाजियाबाद पुलिस थाना में आईपीसी की धारा 498ए, 323, 377 और दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया था। गाजियाबाद की अदालत ने उक्त धाराओं के तहत उसे दोषी करार दिया था। अपीलीय अदालत ने भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया था। इस पर याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की।
हाई कोर्ट में याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 के तहत दोषसिद्धि के संबंध में कहा कि विवाह के बाद, पति की ओर से पत्नी का बलात्कार किए जाने को अभी तक इस देश में अपराध नहीं माना गया है। लेकिन, कई याचिकाएं अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।











