'मर्द शहीद हुए तो हम तैयार', ईरानी महिलाओं ने शुरू की मिलिट्री ट्रेनिंग, अमेरिका-इजरायल को दी जमीनी हमले की चुनौती

'मर्द शहीद हुए तो हम तैयार', ईरानी महिलाओं ने शुरू की मिलिट्री ट्रेनिंग, अमेरिका-इजरायल को दी जमीनी हमले की चुनौती
तेहरान: ईरान ने एक बार फिर संकेत दिया है कि उसका अमेरिका जैसी दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत के सामने झुकने का कोई प्लान नहीं है। ईरान में युवाओं के बड़े पैमाने पर वॉलेंट्री आर्मी में जाने की इच्छा के बाद महिलाओं ने मिलिट्री ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया है। ईरानी महिलाएं स्वेच्छा से हथियार चलाना सीख रही हैं ताकि अमेरिका-इजरायल की फौजें उनकी जमीन पर उतरें तो वह उनका सामना कर सकें। तेहरान से महिलाओं की ट्रेनिंग की ये तस्वीरें ऐसे समय सामने आई हैं, जब अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई को सात महीने से ज्यादा हो गए हैं लेकिन चीजें शांति की ओर जाती नहीं दिख रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया दिनों में कई मौकों पर ईरान को हमले की धमकियां दी हैं।

ईरान की हजारों महिलाओं ने रविवार को तेहरान में हथियारों की ट्रेनिंग में हिस्सा लिया। इमाम हुसैन स्क्वायर पर बने एक मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर मे महिलाओं ने मिलिट्री अधिकारियों और इंस्ट्रक्टरों की बातें सुनीं। इसके बाद महिलाओं को हैंडगन समेत कई तरह के हथियार चलाने, खासतौर से निशाना लगाकर सही तरीके से फायरिंग करने की ट्रेनिंग दी गई। इस दौरान कई महिलाओं ने अमेरिका-इजरायल को जमीनी अभियान की चुनौती भी दी।
अमेरिका और इजरायल बमबारी के जरिए हमें तोड़ने में फेल होने पर जमीनी हमला कर सकते हैं। ऐसे में हम छिपने की जगह उनका सामना करेंगे और अपनी जमीन की हिफाजत करेंगे।
ट्रेनिंग ले रही एक महिला

आम ईरानियों को ट्रेनिंग

तेहरान में रविवार की ट्रेनिंग ईरान की ओर से 'हफ्त-ए-तीर स्क्वायर' पर आम नागरिकों के लिए मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर खोलने के एक दिन बाद की गई है। ट्रेनिंग सेंटर्स से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इन सुविधाओं का मकसद आम नागरिकों और महिलाओं को अमेरिकी और इजरायली सेनाओं के जमीनी हमले के खिलाफ करना करना है।
इस ट्रेनिंग में हिस्सा लेने वाली महिलाओं के लिए ये ड्रिल मुसीबत के समय अपने परिवारों की सुरक्षा के लिए तैयार रहने के बारे में थीं। 45 साल की एक महिला राहेलेह घादिरी ने इस ट्रेनिंग पर कहा कि अपने परिवार और पड़ोस की रक्षा करना सीखने से उनका हौसला बढ़ा है। दूसरी ओर ट्रेनिंग लेने वाली युवा लड़कियों ने मौका पड़ने पर अमेरिका सेना से सीधे भिड़ने तक की बात कही।

ट्रंप की धमकियों से बढ़ा तनाव

अमेरिका-इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए थे। इसके बाद से कई बार ईरान को हवाई हमलों का निशाना बनाया गया है। हालिया हफ्तों में ये हमले कम हुए हैं लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियां ईरानियों की चिंता बढ़ा रही हैं। ट्रंप ने ईरान पर 'बड़ा' फैसला लेने की बात कही है। इसे कई विश्लेषक ईरान पर जमीनी हमले के संकेत की तरह भी देख रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों पर ईरान से भी कड़ी प्रतिक्रिया आ रही है। ट्रंप की चेतावनी के जवाब में ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने कहा है कि हमें दबाव से नहीं तोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर दुश्मन फिर से सैन्य टकराव का रास्ता चुनते हैं तो हमारा जवाब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगा। किसी भी अटैक का पूरी ताकत के साथ बचाव करेंगे।
अब्बास अराघची ने कहा है किअमेरिका-इजरायल को यह समझना होगा कि इसका कोई सैन्य समाधान नहीं है। ना ही इसका नए प्रतिबंधों पर आधारित कोई समाधान है। केवल न्याय और निष्पक्षता पर आधारित बातचीत ही संघर्ष को खत्म कर सकती है। ईरान को सैन्य हमलों के झुकाने की कोई भी कोशिश पहले की तरह फिर से नाकाम होगी।
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