बिजनसलाइन के मुताबिक इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 31 अक्टूबर तक कवच के कमीशनिंग का काम निल है जबकि 637 किमी रेल लाइन को इससे कवर करने का टारगेट था। पिछले फाइनेंशियल ईयर में इस दौरान केवल 10 किमी रेल लाइन को इस सिस्टम से लैस किया गया था। फिलहाल कवच टेक्नोलॉजी देश के कुछ रेलवे रूट पर ही उपलब्ध है। 31 दिसंबर 2022 तक रेलवे नेटवर्क के केवल 1,455 किलोमीटर रूट को कवर किया गया था। इसी रफ्तार से काम चलता रहा तो पूरे नेटवर्क को कवच के दायरे में लाने में कई साल लग जाएंगे।
कैसे होगी रेलयात्रियों की सुरक्षा! इस साल एक इंच भी नहीं बढ़ा 'कवच' का काम
नई दिल्ली: ओडिशा में जून में हुए भयानक रेल हादसे के बाद रेलवे का कवच सिस्टम फिर सुर्खियों में है। कवच एक ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। इसे रेलवे ने आरडीएसओ के जरिए विकसित किया है। इस पर 2012 से ही काम शुरू हो गया था और पिछले साल इस तकनीक का सफल प्रयोग भी किया गया था। लेकिन यह तकनीक अभी कुछ ही रूट्स पर उपलब्ध है। रेलवे की एक परफॉरमेंस रिपोर्ट के मुताबिक इस फाइनेंशियल ईयर में अब तक कवच का काम एक इंच भी नहीं बढ़ा है। यानी अप्रैल से अक्टूबर तक किसी भी नई रेल लाइन को इस सेफ्टी सिस्टम से कवर नहीं किया गया है।
इन्फ्रा में मोर्चे पर भी पिछड़ा रेलवे
रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अप्रैल से अक्टूबर के दौरान 186.65 किमी नई रेल लाइन बिछाई गई है, 1019.69 किमी लाइन का दोहरीकरण किया गया है और 96 किमी लाइन को नैरो से ब्रॉड गेज में बदला गया है। कुल मिलाकर इस मोर्चे पर पिछले साल के मुकाबले 25 परसेंट कम है। इस दौरान ट्रेनों के लेट होने की रफ्तार और भी बढ़ गई। केवल 73 परसेंट ट्रेन ही टाइम पर थीं जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 83.5 परसेंट थी। इन्फ्रास्ट्रक्चर बिल्डिंग के मोर्चे पर भी रेलवे की रफ्तार पिछले साल के मुकाबले धीमी पड़ गई। अप्रैल से अक्टूबर तक केवल आठ गति शक्ति टर्मिनल बनाए गए हैं जबकि पिछले साल पहले सात महीनों में 13 टर्मिनल बनाए गए थे।











