चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में जोर आजमाइश के बाद बसपा ने लोकसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में मायावती ने प्रदेश कार्यालय में यूपी और उत्तराखंड के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने अकेले दम पर चुनाव लड़ने के फैसले को अटल बताते हुए जमीनी स्तर पर जनाधार बढ़ाने की बात कही और प्रत्याशी चयन को लेकर निर्देश दिए। उन्होंने संगठन की रिपोर्ट लेने के बाद कमियां दूर करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि कैडर व्यवस्था को मजबूत करें और युवा मिशनरी लोग तैयार करें।
परिनिर्वाण दिवस पर लखनऊ और नोएडा में होगा बड़ा आयोजन
डॉ. आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर बसपा लखनऊ और नोएडा में दो बड़े आयोजन करेगी। नोएडा में राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल पर छह मंडलों आगरा, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ और सहारनपुर के कार्यकर्ता जुटेंगे। लखनऊ में आंबेडकर स्मारक स्थल पर अन्य 12 जिलों के कार्यकर्ता श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए जुटेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मायावती इन दोनों में से किसी आयोजन में शामिल नहीं होंगी। वह अपने आवास पर ही बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी।
छोटी स्थानीय पार्टियों से कोई परहेज नहीं
मायावती एक ओर तो अकेले दम पर चुनाव लड़ने की बात कर रही हैं, वहीं मिलीजुली सरकार की आशंका भी जता रही हैं। उसमें बसपा की भूमिका अहम बता रही हैं। अब सवाल यह है कि आखिर बसपा की रणनीति क्या है? हाल ही में हुए चार राज्यों के विधानसभा चुनाव से इस बात को समझा जा सकता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बसपा ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ समझौता किया। इससे जाहिर है कि I.N.D.I.A. और NDA से पार्टी ने भले दूरी बना रखी है, लेकिन छोटी स्थानीय पार्टियों से कोई परहेज नहीं है। इस तरह बसपा की कोशिश है कि किसी तरह इन राज्यों में अपना पुराना प्रदर्शन बरकरार रख ले या उसमें कुछ और सुधार कर ले। इसके बाद अगर अंतिम समय में कोई संभावना बनती है तो फिर गठबंधन की राह भी खुल सकती है। लोकसभा में कुछ भी सीटें आ गईं तो फिर चुनाव बाद गठबंधन की सरकार में वह शामिल हो सकती है।











