हीमोग्लोबिन लेवल 1.2 और शरीर में सिर्फ 4 लीटर खून
वात्सल्य के डॉक्टरों ने पाया कि महिला को एक्टोपिक गर्भावस्था थी जो बड़ी हो गई थी और जिसके बाद उसकी फैलोपियन ट्यूब फट गई थी। फैलोपियन ट्यूब के फटने के बाद, उसके पेट में लगभग तीन से चार लीटर खून जमा पाया गया, जिससे उसकी जान बचाने के लिए तत्काल सर्जरी की आवश्यकता पड़ी। अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख डॉ. अनामिका पांडे ने डॉ. स्वप्ना, डॉ. पुलक तोष और डॉ. गीता की टीम के साथ सर्जरी की, जो एक घंटे तक चली, ताकि दरार को ठीक किया जा सके।पटना के डॉक्टरों ने मौत के मुंह से खींच ली जिंदगी
डॉक्टर अनामिका पांडे ने बताया कि 'हमने ऑपरेशन टेबल पर सरिता को 30 यूनिट खून और अन्य रक्त घटक चढ़ाए। इसमें पीआरबीसी की 8 यूनिट, एफएफपी की 10 यूनिट, क्रायो की 6 यूनिट और प्लेटलेट्स की 6 यूनिट शामिल थीं।' सर्जरी के बाद महिला दो दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी लेकिन अब वह ठीक है और गुरुवार को उसे छुट्टी दे दी जाएगी। सरिता के पति अखिलेश्वर गुप्ता ने कहा कि उनकी पत्नी को नयी जिंदगी मिल गयी है। उनके मुताबिक 'सारण के कई अस्पतालों में इलाज कराने के बाद हमने उम्मीद छोड़ दी थी। हम हताशा के कारण यहां आए लेकिन हम भगवान के आभारी हैं जो इन डॉक्टरों ने मेरी पत्नी की जिंदगी बचा ली।'











