रामसे परिवार की अगली पीढ़ी को आगे ले जा रहे दीपक रामसे ने उन दिनों का किस्सा सुनाया और बताया कि गुजरे वक्त में भूतिया फिल्में कैसे तैयार होती थीं। 'भास्कर' की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बताया कि उनके चाचा किरण रामसे ऐसी फिल्मों के लिए कब्रिस्तान में जाकर साउंड रिकॉर्डिंग किया करते थे और उसी आवाज को फिल्मों में इस्तेमाल किया जाता था। बताया जाता है कि वे रात में 9 बजे कब्रिस्तान में घुसते थे और सुबह 4 बजे निकलते थे, जिसे वे 'स्पेशल ग्रेवयार्ड शूट' कहते।
उन फिल्मों की शूटिंग क्रबिस्तान, पुराने खंडहरों में होती थी
पृथ्वीराज कपूर और मुमताज के सीन से आया भूतिया फिल्मों का खयाल
कब्रिस्तान के उस गड्ढे में लाश निकल आई थी
उन्होंने लिफ्ट दिया, उसके दोनों पैर मुड़े हुए थे
इसी घटना पर 5 साल बाद बनाई फिल्म 'वीराना'
कब्रिस्तान से साउंड रिकॉर्ड करके घर आए उसे सुनकर सबके होश उड़ गए
एक बार वे कब्रिस्तान से साउंड रिकॉर्ड करके घर आए और जब उसे सुना तो सभी के होश उड़ गए क्योंकि उसमें किसी आदमी के सांस लेने की आवाजें आ रही थीं।











