राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लिए माननीय प्रधानमंत्री ने तप किया अब बारी उन लोगों की है जो भ्रष्टाचार और गलत आचरण में लिप्त हैं उन्हें भी इन सब का त्याग करना होगा क्योंकि *राम राज्य* की कल्पना लिए हम आगे बढ़ रहे हैं, परंपरा और संस्कृति का देश जहां मेहनत ईमानदारी आत्मिता अपनत्व और सद्भावना की भावना का बोध चहू और दिखे।
यदि कोई भूखा है तो उसे एक-दो वक्त रोटी खिला दो परंतु निरंतर उसे *मुफ्त में खाना(अनाज) देने की बजाय* उसे कुछ काम करने का कहें ताकि वह दो वक्त की *रोटी कमा सके।*
इस समय सरकारो ने फ्री में बांटने का सिलसिला जारी कर रखा है वह उन *लोगो को मठ्ठा* बना देगी उन्हें फ्री में खाने की आदत डलवा देगी और *वह सब आलसी बन जाएंगे* उन्हें हर चीज हर वैभव बैठे-बैठे चाहने लगेगा तब हो सकता है उनमें से कुछ क्रिमिनल भी बन जाए। सरकारी आंकड़े बताते हैं 20 करोड लोगों को अनाज बटता है 10 करोड लोगों को गैस के सिलेंडर दिए और प्रांतीय सरकारे भी जाने क्या-क्या निशुल्क बांट रही है यहां तक की कुछ प्रांत में महिलाओं को हर महीने उनके खाते में पैसे भी भेजे जाते हैं।
पहले जातिगत आरक्षण का दौर चला एक- दो बार आरक्षण दो, लेकिन उनकी संपन्नता के बावजूद भी उनके परिवारों को निरंतर आरक्षण दिए जा रहे हैं। *जबकि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना था।*
कई बड़े सेलिब्रिटी और नामचिन नेता अपने आप को दलित जाट गरीब किसान चाय वाला कहते हैं क्यों कहते हैं ?
*भारतीय रामराज्य मे वोटो की नहीं दिलों की आवश्यकता है।*
जय श्री राम वंदे मातरम जय भारत
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)











