इस वजह से टाला फैसला
सरकार ने लैपटॉप, टैबलेट और ऑल इन वन पर्सनल कंप्यूटर के आयात पर लगाई गई पाबंदी को ऐसे ही नहीं टाला है। दरअसल कोरोना महामारी के दौरान जब लैपटॉप और कंप्यूटर की डिमांड बढ़ गई थी, उस समय इनकी ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो गई थी। इन सबसे दाम बढ़ गए थे। इस बार भी त्योहारों का समय नजदीक है। त्योहार आने वाले हैं। ऐसे में इन सब सामानों की मांग बढ़ेगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सरकार को डर है कि त्योहारों में बैन की वजह से कहीं फिर से लैपटॉप, टैबलेट आदि के दाम फिर से न बढ़ने लगे। इनकी ब्लैक मार्केटिंग का शुरू हो जाए। इन्हीं सब को देखते हुए सरकार ने बैन को अभी टाल दिया है, जिससे त्योहारों के दौरान एकदम से अफरा-तफरी न मचे। लोगों को किसी तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े।घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने की तैयारी
इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक ट्वीट में कहा कि इस कदम के पीछे का मकसद 'विश्वसनीय हार्डवेयर और सिस्टम सुनिश्चित करना, इम्पोर्ट पर निर्भरता को कम करना और इस कैटिगरी के प्रॉडक्ट की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाना है। इस फैसले में लाइसेंस राज जैसा कुछ भी नहीं है।' बता दें कि DGFT ने एक पोर्टल तैयार किया है और कंपनियां/व्यापारी लाइसेंस प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उम्मीद है कि भरी गई डिटेल्स सही होने पर DGFT तीन से चार दिनों के भीतर लाइसेंस जारी कर देगा।जो भी सौदा पहले हो चुका है और खेप रवाना हो चुका है तो उनके आयात के लिए लाइसेंस के बिना अनुमति दी जाएगी। एक सीनियर सरकारी अफसर ने शुक्रवार को कहा कि लैपटॉप और कंप्यूटर पर लगाए गए आयात पाबंदी से चीन के साथ भारत के व्यापार घाटे को पाटने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इस कदम से इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों को इन डिवाइस को केवल असेंबल करने के बजाय भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने में भी मदद मिलेगी।











