भारत सरकार ने बढ़ाए कदम 2030 के भारत की ओर.. (1) Updated on 30 Jun 2023, 05:34 PM 2030 के भारत के सतत विकास एजेंडा पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कथित शब्द इस प्रकार हैं.."एजेंडा 2030 के पीछे की हमारी सोच जितनी ऊँची है हमारे लक्ष्य भी उतने ही समग्र हैं। इनमें उन समस्याओं को प्राथमिकता दी गई है, जो पिछले कई दशकों से अनसुलझी हैं और इन लक्ष्यों से हमारे जीवन को निर्धारित करने वाले सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय पहलुओं के बारे में हमारे विकसित होती समझ की झलक मिलती है। मानवता के 1/6 हिस्से के सतत् विकास का विश्व और हमारे सुंदर पृथ्वी के लिए बहुत गहरा असर होगा।” – श्री नरेन्द्र मोदीहम विश्व को एक नवीन रूप प्रदान करने के मोड़ पर खड़े हैं, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति की सोचने की समझ और नजरिये में एक क्राँतिकारी बदलाव आएगा। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से सतत् विकास के 17 लक्ष्यों की ऐतिहासिक योजना शुरू की है जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक अधिक संपन्न, समर्थ, सक्षम, समतावादी और संरक्षित विश्व की रचना करना है, जिसमे भारत भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। #2030 के भारत के सतत विकास एजेंडा के अंतर्गत ऐसे विषय शामिल किए गए हैं जिनसे हम बहुत समय से जूझ रहे हैं जैसे गरीबी, भुखमरी, शिक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, जलवायु, अन्य प्राणियों, जल और पेड़-पौधों की सुरक्षा, आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विकास तथा अन्य। इस एजेंडा पर कार्य करने के लिए केवल आर्थिक वृद्धि को महत्व देने से बात नहीं बनेगी, बल्कि निष्पक्ष और अधिक समतामूलक समाज तथा अधिक संरक्षित एवं संपन्न पृथ्वी पर भी ध्यान देना होगा। इसके साथ ही, 2030 के एजेंडा का मूल मंत्र है: ‘कोई पीछे न छूटे’। यह सार्वभौमिकता का सिद्धांत है। विकास को अपने सभी आयामों में सभी के लिए, हर जगह समावेशी होना चाहिए और उसका निर्माण हर किसी की विशेषकर गरीब और लाचार लोगों की भागीदारी से होना चाहिए। भारत के राष्ट्रीय विकास लक्ष्य के लिए “सबका साथ सबका विकास” नीतिगत पहल, सतत् विकास लक्ष्यों के अनुरूप है और भारत दुनियाभर में इन सभी लक्ष्यों में सफलता निर्धारित करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इन दिनों भारत में संयुक्त राष्ट्र सतत् विकास लक्ष्यों को स्थानीय स्वरूप में ढ़ालने के लिए राज्य सरकारों को समर्थन दे रहा है ताकि राज्य स्तर पर विकास की प्रमुख चुनौतियों का समाधान हो सके।आइये, हम एक-एक करके इन लक्ष्यों पर बात करते हैं, जिन पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमारी भागीदारी भी आवश्यक है।1 शून्य गरीबी2 शून्य भुखमरी3 उत्तम स्वास्थ्य तथा खुशहाली4 गुणवत्तापूर्ण शिक्षा5 लैंगिक समानता6 स्वच्छ जल तथा स्वच्छता7 सस्ती तथा प्रदुषण-मुक्त ऊर्जा8 उत्कृष्ट कार्य तथा आर्थिक वृद्धि 9 उद्योग, नवाचार तथा बुनियादी सुविधाएँ10 असमानताओं में कमी11 संवहनीय शहर तथा समुदाय12 संवहनीय उपभोग तथा उत्पादन13 जलवायु कार्रवाई14 जलीय जीवों की सुरक्षा15 थलीय जीवों की सुरक्षा16 शांति, न्याय तथा सशक्त संस्थाएँ17 लक्ष्य हेतु भागीदारी I Share: