नर्सिंग स्टाफ की भी कमी
करीब पांच साल पहले इस स्वास्थ्य केंद्र में सात डाक्टर पदस्थ थे। यहां मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए तीन अतिरिक्त डाक्टरों की पदस्थापना करने का प्रस्ताव बनाया गया था, लेकिन पद बढ़ाना तो दूर स्वीकृत पद भी नहीं भरे जा रहे है। वर्तमान में यहां ब्लाक मेडीकल आफिसर सहित मात्र तीन डाक्टर हैं। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 200 मरीज पहुंचते हैं। कई बार उन्हें वापस लौटना पड़ता है। नर्सिग स्टाफ की भी कमी महसूस की जा रही है। दो साल पहले तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डा. प्रभुराम चौधरी ने गांधीनगर अस्पताल को सिविल दर्जा देने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में इसे खारिज कर दिया गया।
समय पर नहीं आते डाक्टर
अस्पताल में महिला चिकित्सक की कमी के कारण महिलाओं का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र के रहवासी एवं सोशल एक्टिविस्ट शिव प्रसाद अहिरवार के अनुसार अस्पताल में डाक्टर समय पर नहीं पहुंचते। अहिरवार ने इस संबंध में सीएमएचओ को भी अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं से अवगत कराया है। अहिरवार ने अस्पताल में अतिरिक्त चिकित्सक पदस्थ करने की मांग की है।
गांधीनगर अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या एवं नर्सिंग स्टाफ बढ़ाने के लिए हमने स्वास्थ्य मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों से आग्रह किया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बढ़ती आबादी को देखते हुए इसे सिविल अस्पताल का दर्जा देना चाहिए। हम लोकसभा चुनाव के बाद स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करेंगे।











