भाई-भाई में मुकाबला
सीताशरण शर्मा 1990 से लगातार तीन बार से विधायक थे। साल 2003 और 2008 में गिरिजाशंकर शर्मा विधायक बने। अब 2013 से सीतारमण शर्मा ही यहां के विधायक हैं। यहां बाजार के बीचोंबीच अपनी दुकान में बैठे 29 साल के कमलेश ललवानी कहते हैं कि यहां बेरोज़गारी एक बड़ा मुद्दा है। वह ये भी कहते हैं कि इतने साल में यहां का विकास नहीं हो पाया और यही वजह है कि इस बार दोनों पार्टियों के बीच लड़ाई काफी तगड़ी दिखाई दे रही है।बारी-बारी से लड़ने का गेम ओवर, एमपी की इस सीट पर भाई-भाई में मुकाबला
होशंगाबाद : नर्मदापुरम के सेठानी घाट की शांति देखकर ऊपर से लग सकता है कि होशंगाबाद की चुनावी फिजा भी इतनी ही शांत है, लेकिन ऐसा है नहीं। सतरस्ते यानि सात रास्तों वाले चौराहे के बाजार में वोटर किस राह की ओर मुड़ेगा यह फिलहाल तो नर्मदा की गहराई में है। मौजूदा विधायक सीतारमण शर्मा का मुकाबला अपने भाई गिरिजा शंकर से ही है। सीताशरण BJP तो गिरिजाशंकर कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे हैं। बारी-बारी से दोनों भाइयों का इस सीट से गहरा ताल्लुक रहा है।
भाई-भाई में मुकाबला
सीताशरण शर्मा 1990 से लगातार तीन बार से विधायक थे। साल 2003 और 2008 में गिरिजाशंकर शर्मा विधायक बने। अब 2013 से सीतारमण शर्मा ही यहां के विधायक हैं। यहां बाजार के बीचोंबीच अपनी दुकान में बैठे 29 साल के कमलेश ललवानी कहते हैं कि यहां बेरोज़गारी एक बड़ा मुद्दा है। वह ये भी कहते हैं कि इतने साल में यहां का विकास नहीं हो पाया और यही वजह है कि इस बार दोनों पार्टियों के बीच लड़ाई काफी तगड़ी दिखाई दे रही है।
फिजा में बदलाव का इशारा!
कमलेश के पड़ोस में ही एक साड़ी की दुकान में मोना चौहान, रोहित जोशी और मनोज यादव मौजूद हैं और इक्का-दुक्का ग्राहकों को साड़ियां दिखा रहे हैं। ये तीनों ही यहां सेल्सपर्सन का काम करते हैं, पूछने पर बताते हैं कि दुकान के मालिक शहर से बाहर गए हुए हैं। इन लोगों से बातचीत करते हुए इस बात का अहसास होता है कि कम से कम इस इलाके की जनता को लगता है कि अब की बार बदलाव हो सकता है।
17 नवंबर को वोटिंग, 3 दिसंबर को रिजल्ट
मनोज यादव कहते हैं, ‘दो भाइयों के बीच मुकाबला है, यानी मामला तो घर का ही है। जो भी होगा घर में ही होगा, ऐसे में जनता के बारे में कौन सोचता है।’ इस बीच घाट पर लोग अपने-अपने कामों में लगे हुए हैं। कोई पंडिताई कर रहा था तो कोई नर्मदा स्नान। इस बात से बेखबर की 17 नवंबर को यहां वोट डाले जाएंगे, जिसकी गवाह नर्मदा की यह शांत धारा भी बनेगी।











