विराट कोहली का टेस्ट करियर
विराट कोहली ने भारत के लिए 2008 में इंटरनेशनल डेब्यू किया था। लेकिन पहला टेस्ट खेलने के लिए उन्हें तीन साल का इंतजार करना पड़ा। 2011 वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारतीय टीम वेस्टइंडीज दौरे पर गई थी। जमैका स्थित किंग्सटन के सबीना पार्क के मैदान पर उनका डेब्यू हुआ। पहली पारी में उन्होंने चार और दूसरी में 15 रन बनाए। विराट का पहला अर्धशतक उसी साल वेस्टइंडीज के खिलाफ ही वानखेड़े के मैदान पर आया।2012 की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहले दो टेस्ट में फेल होने के बाद विराट ने तीसरे में 75 रनों की पारी खेली। एडिलेड में हुए आखिरी टेस्ट में भारत को हार मिली लेकिन 116 रनों की पारी खेलकर विराट छा गए। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। भारत के लिए 123 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 46.85 के औसत से 30 शतकों की मदद से 9230 रन बनाए हैं।
भारत के लिए सबसे ज्यादा दोहरा शतक
दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने सात दोहरे शतकों के साथ इस प्रारूप के दिग्गज के रूप में अपनी पहचान बनाई जो किसी भारतीय खिलाड़ी के लिए सबसे अधिक है। वह महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर (4), सचिन तेंदुलकर (6), वीरेंद्र सहवाग (6) और राहुल द्रविड़ (5) से काफी आगे है। इसके साथ ही विराट भारत के लिए सबसे ज्यादा टेस्ट जीतने वाले कप्तान भी हैं। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने 40 टेस्ट जीते। दूसरे नंबर पर काबिज महेंद्र सिंह धोनी के नाम 27 जीत है।











