मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "आज कांग्रेस के पूर्व विधायक पारुल साहू, शेर सिंह यादव और अमित सक्सेना भाजपा में शामिल हुए हैं... एक तरफ वे मंदिर का विरोध करते हैं और दूसरी तरफ 'दुआ' करते हैं। ये दोहरा चरित्र नहीं चलेगा। जनता माफ नहीं करेगी।
गौरतलब है कि पारुल साहू ने बुधवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद गुरुवार को भोपाल पहुंचकर पूर्व मंत्री और भाजपा के न्यू ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डा. नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की थी। इससे पहले वे मंगलवार को सागर में भी कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत व भाजपा जिला अध्यक्ष गौरव सिरोठिया से मिली थीं। छिंदवाड़ा के कांग्रेस नेता और दीपक सक्सेना के चचेरे भाई जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना ने भी भाजपा का दामन थाम लिया।
2013 में चुनी गई थीं विधायक
गौरतलब है कि वर्ष 2013 में पारुल भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बनी थीं, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था। इसके बाद 2020 में प्रदेश में हुई सियासी उठापटक के बाद जब गोविंद सिंह राजपूत कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए और सुरखी सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया तो पारुल ने नाराज होकर भाजपा छोड़ दी थी और कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरीं। हालांकि तब उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। पारुल ने बुधवार को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को एक लाइन का इस्तीफा लिखकर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया था। उनके इस्तीफा देने के साथ ही भाजपा में शामिल होने की अटकलें चल रही थीं।











