कांग्रेस की पूर्व विधायक पारुल साहू और अमित सक्‍सेना ने थामा भाजपा का दामन

कांग्रेस की पूर्व विधायक पारुल साहू और अमित सक्‍सेना ने थामा भाजपा का दामन
छिंदवाड़ा। भाजपा के प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को सागर जिले के सुरखी से कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री व पूर्व विधायक पारूल साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष छिंदवाड़ा अमित सक्सेना सहित कुछ अन्य कांग्रेस नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ली। उनके साथ डा. प्रतीभा राजगोपाल, जनपद सदस्य गैरतगंज रिजवान खान, जनपद सदस्य बेगमगंज वीरेंद्र सिंह यादव, जनपद सदस्य गैरतगंज दीपक धाकड़, जनपद सदस्य बेगमगंज सुरेश, देवेंद्र, पूर्व प्रदेश प्रतिनिधि कांग्रेस कमेटी वीरेंद्र सिंह यादव, मध्य प्रदेश पुलिस कर्मचारी संघ प्रदेश अध्यक्ष बल्लू यादव, यादव महासभा प्रदेश उपाध्यक्ष शेर सिंह यादव, रायसेन पसमांदा मुस्लिम समाज जिलाध्यक्ष अफरोज अली, बेगमगंज युवा कांग्रेस ब्लाक पूर्व अध्यक्ष संदीप यादव, शासकीय महाविद्यालय छिंदवाड़ा पूर्व अध्यक्ष शाहिद खान सहित सरपंच, सरपंच प्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पार्टी की सदस्यता ली। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मंत्री व न्यू ज्वाइनिंग टोली के प्रदेश संयोजक डा. नरोत्तम मिश्रा, प्रदेश शासन के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत एवं पूर्व मंत्री रामपाल सिंह के समक्ष ने पार्टी का अंगवस्त्र पहनाकर सभी का स्वागत किया।

 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "आज कांग्रेस के पूर्व विधायक पारुल साहू, शेर सिंह यादव और अमित सक्सेना भाजपा में शामिल हुए हैं... एक तरफ वे मंदिर का विरोध करते हैं और दूसरी तरफ 'दुआ' करते हैं। ये दोहरा चरित्र नहीं चलेगा। जनता माफ नहीं करेगी।

गौरतलब है कि पारुल साहू ने बुधवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद गुरुवार को भोपाल पहुंचकर पूर्व मंत्री और भाजपा के न्यू ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डा. नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की थी। इससे पहले वे मंगलवार को सागर में भी कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत व भाजपा जिला अध्यक्ष गौरव सिरोठिया से मिली थीं। छिंदवाड़ा के कांग्रेस नेता और दीपक सक्‍सेना के चचेरे भाई जिला पंचायत उपाध्‍यक्ष अमित सक्‍सेना ने भी भाजपा का दामन थाम लिया।

2013 में चुनी गई थीं विधायक

गौरतलब है कि वर्ष 2013 में पारुल भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बनी थीं, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था। इसके बाद 2020 में प्रदेश में हुई सियासी उठापटक के बाद जब गोविंद सिंह राजपूत कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए और सुरखी सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया तो पारुल ने नाराज होकर भाजपा छोड़ दी थी और कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरीं। हालांकि तब उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। पारुल ने बुधवार को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को एक लाइन का इस्तीफा लिखकर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया था। उनके इस्तीफा देने के साथ ही भाजपा में शामिल होने की अटकलें चल रही थीं।



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