दुनिया की सबसे युवा भारत की संसद का पहला दिन

दुनिया की सबसे युवा भारत की संसद का पहला दिन
यह क्या किया स्पीकर महोदय पहले दिन ही 50 साल पुरानी बात को ले बैठे हर सरकार अपने-अपने हिसाब से निर्णय लेती है सही निर्णय भी होते हैं गलत निर्णय भी होते हैं और गलती करने के लिए वह माफी भी मांग चुके थे और जनता ने उन्हें सबक भी सिखा दिया था। लेकिन इतनी पुरानी बात को नए सत्र के पहले दिन आपने क्यों कहीं आपको नए सत्र में सांसदों को सीख देना थी कि देशहित के लिए क्या जरूरी है आपको वर्तमान स्थिति की बातें करना थी यदि हम पूर्व की ही बातें करते रहेंगे तो वर्तमान और भविष्य का क्या होगा। आजकल हम देख रहे हैं हर कोई पूर्व की बातें कर रहा है वर्तमान की हमारी तकलीफे और जरूरत को कोई समझने को तैयार नहीं है, भविष्य के लिए कोई योजना और निती की बात नहीं हो रही है क्या यही सरकार की परिभाषा है।
आप सब पूर्व के उस जमाने की बातें कर रहे हैं जबकी भारत की नई पीढ़ी के कई लोगों ने जन्म भी नहीं लिया उन्हें वर्तमान और भविष्य चाहिए, आबादी हमारी बड़ी हुई है उनका ख्याल रखना है।
अशोक मेहता  (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)
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