संसद की विजिटर्स गैलरी में स्प्रे कैन लेकर कूदने वाले लखनऊ के सागर शर्मा के घर पर लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) की टीम ने जांच पड़ताल की। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान टीम को उसके घर से दो डायरी मिली हैं। इसमें से एक नीली और एक लाल डायरी है, जिन पर कई बागी विचार अंग्रेजी और हिंदी में लिखे हैं। सागर के पिता रोशनलाल शर्मा ने पूछताछ में बताया कि ये डायरी सागर किसी को नहीं देता था। खुद ही पढ़ता और लिखता था।
इनमें से एक डायरी में लिखा है, “घर से विदा लेने का समय नजदीक आ गया है। एक तरफ डर भी है और दूसरी तरफ कुछ भी कर गुजरने की आग दहक रही है। काश मैं अपनी स्थिति माता पिता को समझा सकता, मगर ऐसा नहीं है कि मेरे लिए संघर्ष की राह चुनना आसान है। पांच सालों से उम्मीद लगाए प्रतीक्षा की है कि एक दिन आएगा, जब मैं अपने कर्तव्य की ओर बढ़ूंगा। दुनिया में ताकतवर व्यक्ति वह नहीं, जो छीनना जानते हैं। ताकतवर व्यक्ति वह है, जो हर सुख त्यागने की क्षमता रखता है।”
पिता बोले- इस डायरी में लिखी बातों का मतलब नहीं जानता
सागर के पिता रोशनलाल शर्मा ने भी बताया कि वह इस डायरी को अक्सर लिखा करता था। इसमें लिखी बातों का क्या अर्थ है... इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता है...।
खुफिया एजेन्सियों को सागर का वर्ष 2013 में हाईस्कूल पास होने का प्रमाण पत्र और अंक पत्र भी मिला है। इसके मुताबिक रामनगर स्थित सिंधी विद्या स्कूल से उसने हाईस्कूल की पढ़ाई की है। इसमें वह पास हुआ था, लेकिन गणित विषय में वह फेल था। इसके बाद उसने इंटरमीडिएट तक ही पढ़ाई की।
पिता ने ललित पर बरगलाने का आरोप लगाया
पुलिस पूछताछ में सागर के पिता रोशन लाल ने ललित और मनोरंजन पर बेटे को बहकाने का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक सागर अधिकतर घर पर नहीं रहता था। रात को आता था तो कोई फोन आने पर बाहर चला जाता था। बेंगलुरु में दो साल रहने के दौरान ललित और मनोरंजन के संपर्क में आया।
जो अपने फायदे के लिए बेटे को गलत रास्ते पर ले गए। वह पहले ऐसा नहीं था। दोस्तों और रिश्तेदारों का कहना है कि वह फेसबुक पर तो कई क्रांतिकारी पोस्ट डालता था, लेकिन उन लोगों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह ऐसा करेगा। उन्हें लगता था कि वह खुद को होशियार दिखाने के लिए कट-पेस्ट करके पोस्ट डालता है।
जुलाई में दिल्ली गया था सागर
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, संसद में घुसपैठ से पहले जुलाई में सागर गोमती एक्सप्रेस से लखनऊ से दिल्ली पहुंचा। हालांकि ये अभी स्पष्ट नहीं है कि वह जुलाई में दिल्ली क्यों गया था। लेकिन सागर ने ही स्प्रे कैन रखने के लिए लखनऊ से स्पेशल जूते बनवाए थे, जिसके सोल में कैन छिपाई जा सके। उसे पता था कि संसद जाने के बाद सब सामान की चेकिंग होती है, लेकिन जूते चेक नहीं किए जाते।
घर पर ताला लगा, परिजन अंडर ग्राउंड
आलमबाग के रामनगर स्थित सागर के घर पर गुरुवार सुबह से ही ताला लगा हुआ है। जहां लोगों का कहना है कि जांच एजेंसी के लोग उनके परिजनों को लेकर दिल्ली चले गए। वहीं परिजनों का कहना है कि लोगों के आने-जाने से परेशान होकर सागर के परिजन रिश्तेदार के घर चले गए हैं। हालांकि इसकी किसी ने पुष्टि नहीं की। सागर के मामा ने किसी से भी बात करने और घर पर किसी के न होने की बात कहते हुए बाहर से अपने घर को बंद कर रखा था।
अब बताते हैं संसद कांड के कथित मास्टरमाइंड ललित मोहन झा के बारे में...
इस पूरी घटना का साजिशकर्ता कोलकाता का रहने वाला ललित मोहन झा था। एक एनजीओ से जुड़ा ललित मोहन फेसबुक की मदद से सागर और नीलम से संपर्क में आया था। इसके बाद उन्होंने अन्य लोगों को जोड़कर पूरी घटना को अंजाम दिया।
संसद पर हुए प्रदर्शन का वीडियो खुद ललित ने बनाया। इसके बाद सबसे पहले अपनी फेसबुक वॉल पर पोस्ट किया। फिर बस से राजस्थान अपने दोस्त के घर भाग गया, लेकिन पुलिस की सक्रियता देखकर रात भर एक होटल में रुकने के बाद अगले दिन दिल्ली आकर पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया।
ललित हरियाणा का, कोलकाता की NGO से जुड़ा
सागर, ललित झा के विचारों से प्रभावित था। कथित मास्टरमाइंड ललित उसकी हर पोस्ट में टैग होता था। ललित की फेसबुक वॉल पर ही घटना का पहला वीडियो अपलोड होना बताता है कि घटना के वक्त वह मौजूद था और सबको बताना चाहता था कि उसके ग्रुप ने कोई क्रांतिकारी काम किया है।
ललित के सीधे संपर्क में नीलम और सागर थे। यह लोग करीब 2 साल से एक-दूसरे को मैसेज कर रहे थे। साथ ही, वॉट्सऐप कॉल भी करते थे। दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया कि ललित के पास ही चारों आरोपियों के मोबाइल थे। जिन्हें घटना के बाद वो लेकर फरार हो गया था। सूत्रों के मुताबिक ललित मूलरूप से हरियाणा का रहने वाला है और कोलकाता में एक एनजीओ से जुड़ा है। जिसका जिक्र उसकी फेसबुक वॉल पर भी है।
ललित की भी प्रोफाइल पर भगत सिंह की फोटो
ललित की सोशल मीडिया प्रोफाइल पर भी भगत सिंह की फोटो है। उसके भी दो एकाउंट होने की बात सामने आई है। वह लोग वॉट्सऐप की ग्रुप कॉलिंग के साथ सिग्नल एप पर जुड़कर इस रणनीति को बनाया था। बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ साल पहले वह मैसूर में मिले थे। उसके बाद उन्होंने संसद में अपना विरोध प्रदर्शन का प्लान बनाया था।











