विकसित भारत की कल्पना एक ऐसे कठोर और समावेशी बुनियादी ढांचे से है जो जीवन और व्यापार को सरल बनाए। भारत जैसे विशाल और विविध देश को जन परिवहन, कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स में बहुविध तकनीकों तक समान पहुंच चाहिए। यही समय है जब हमें स्वदेशी समाधान और तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ना है। जिस प्रकार UPI और जनधन ने वित्तीय समावेशन को बदल दिया, और कोविड वैक्सीन के मामले में भारत ने वैश्विक नेतृत्व किया, वैसा ही आत्मनिर्भर दृष्टिकोण हमें शिक्षा, स्वास्थ्य और दूरसंचार में अपनाना होगा। भारत की शिक्षा नीति को व्यवहारिक कौशल और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना होगा, और स्वास्थ्य में ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जो आपात स्थितियों में त्वरित और सबके लिए सुलभ हो। आज आवश्यकता है कि भारत का युवा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बने। यही आत्मनिर्भर भारत विकसित भारत का आधार बनेगा।
जैसा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा — “विकसित भारत के निर्माण के लिए आत्मनिर्भर भारत का निर्माण जरूरी है।”
विकसित भारत हमारा साझा सपना है — जिसमें आत्मनिर्भरता केवल उत्पादन की नहीं, विचार और आत्मबल की भी हो।
✍️ राजा पाठक,लेखक, सदस्य, राष्ट्रीय कार्यक्रम विभाग, भाजपा, मध्य प्रदेश











