वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि एस्टेरॉयड से तत्काल कोई खतरा नहीं है। इस उल्कापिंड का नाम 2024 RF2 है। ऐसे छोटे आकार के एस्टेरॉयड अक्सर हमारी पृथ्वी के करीब से गुजरते रहते हैं। यह पृथ्वी के करीब की वस्तुए हैं। इनका पृथ्वी के करीब से गुजरना वैज्ञानिकों को इनकी निगरानी करने का सुनहरा मौका देता है। इसके अलावा इनसे होने वाले जोखिमों के आकलन में मदद करता है। इनका आकलन तब भी किया जाता है, जब ये एस्टेरॉयड कोई नुकसान न पहुंचाने वाले हों।
पृथ्वी के करीब आ रही तबाही, धरती के पास से गुजरेगा हवाई जहाज के बराबर का एस्टेरॉयड, क्या खतरनाक होगा?
वॉशिंगटन: धरती के करीब से 8 सितंबर को एक तबाही गुजरने वाली है। धरती के करीब से एक 100 फुट आकार का एस्टेरॉयड गुजरेगा। यह लगभग एक हवाई जहाज के आकार का है। अगर यह एस्टेरॉयड धरती पर गिरे तो एक बड़ी तबाही ला सकता है। लेकिन इससे डरने की जरूरत नहीं है। यह एस्टेरॉयड पृथ्वी से 15.2 लाख किमी की सुरक्षित दूरी से गुजरेगा। पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी से यह लगभग चार गुना ज्यादा है। हालांकि इसका पृथ्वी के करीब से गुजरना भी आकर्षित करता है।
एस्टेरॉयड की स्टडी क्यों जरूरी
एस्टेरॉयड को अक्सर लघु ग्रह कहा जाता है। यह शुरुआती सौर मंडल के प्राचीन अवशेष हैं। यह लगबग 4.6 अरब साल पुराने हैं। ग्रहों के विपरीत इनमें वायुमंडल का अभाव होता है। उनका आकार भी अनियमित होता है। वैज्ञानिक लगातार इनकी स्टडी करते रहते हैं, ताकि भविष्य में इसके पृथ्वी से टकराने से जुड़ी भविष्यवाणी कर सकें।
एस्टेरॉयड हमेशा से पृथ्वी के लिए खतरनाक रहे हैं। इतिहास में पृथ्वी पर एस्टेरॉयड की टक्कर होती रही है। चिक्सुलब की घटना इनमें से एक है। इसके कारण लगबग 6.6 करोड़ साल पहले डायनासोर का पूरी तरह खात्मा हो गया। ऐसे में एस्टेरॉयड के खतरों को लेकर हमेशा सवाल उठते रहते हैं। OSIRIS-REx और हायाबुसा-2 जैसे मिशनों ने एस्टेरॉयड के नमूनों को इकट्ठा किया है। यह सौर मंडल की उत्पत्ति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि उन्हें पता चल सकेगा कि धरती पर पानी कैसे पहुंचा।











