तुलसीदास जयंती पर रामभक्ति से गूंजा दादाजी धाम, विशेष पूजन व रुद्राभिषेक

तुलसीदास जयंती पर रामभक्ति से गूंजा दादाजी धाम, विशेष पूजन व रुद्राभिषेक
भोपाल / जागृत एवं दर्शनीय तीर्थ स्थल दादाजी धाम मंदिर, रायसेन रोड, पटेल नगर, भोपाल में बुधवार को श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी के पावन अवसर पर संत गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर के गर्भगृह के परिक्रमा स्थल में विराजमान संत गोस्वामी तुलसीदास जी का पंडित राजेंद्र पलिया के मार्गदर्शन में विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन किया गया। श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किए और संत शिरोमणि को नमन किया।
पंडित राजेंद्र पलिया ने उपस्थित श्रद्धालुओं को विधि-विधानपूर्वक तुलसीदास जी की पूजा-अर्चना कराई तथा भगवान शिव का रुद्राभिषेक संपन्न कराया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए धार्मिक अनुष्ठान से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का पूजन कर पुष्पों से मनोहारी श्रृंगार किया और सुख-शांति, समृद्धि एवं सर्वजन कल्याण की प्रार्थना की।
श्री श्री 1008 श्री दादाजी गुरुदेव चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष शिवरतन नामदेव ने कहा कि संत गोस्वामी तुलसीदास जी सनातन धर्म की भक्ति परंपरा के महान संत, कवि और भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त थे। उन्होंने श्रीरामचरितमानस के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, मर्यादा, सत्य, धर्म, सेवा और भक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। उनकी रचनाएं आज भी समाज को सनातन संस्कार एवं सदाचार की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने बताया कि श्रावण मास में दादाजी धाम मंदिर में प्रतिदिन श्रद्धालुओं द्वारा भगवान शिव का रुद्राभिषेक कराया जा रहा है। भक्तजन इसमें सहभागी होकर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना कर रहे हैं। पंडित जी के मार्गदर्शन में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होने वाली शिव आराधना से मंदिर परिसर में निरंतर आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।
तुलसीदास जयंती के अवसर पर श्रीरामचरितमानस एवं हनुमान चालीसा के पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक गतिविधियों से परिक्रमा स्थल आध्यात्मिक चेतना से आलोकित रहा। मंदिर परिसर में ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष गूंजते रहे।
शिवरतन नामदेव ने श्रद्धालुओं से परिवार सहित दादाजी धाम मंदिर पहुंचकर धार्मिक आयोजनों में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम की भक्ति मर्यादा और संस्कार का मार्ग दिखाती है, वहीं भगवान शिव की आराधना श्रद्धा एवं आत्मिक शांति प्रदान करती है। संत तुलसीदास जी की भक्ति परंपरा और श्रावण मास की शिव साधना सनातन संस्कृति की आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ा रही है।


 
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