5 साल में 7 हजार गुना बढ़े साइबर अपराध : प्रदेश में लगातार ट्रेंड बदलकर बना रहे हैं ठगी का शिकार

5 साल में 7 हजार गुना बढ़े साइबर अपराध : प्रदेश में लगातार ट्रेंड बदलकर बना रहे हैं ठगी का शिकार

सूबे में साइबर अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। बीते पांच सालों में साइबर अपराधों के ग्राफ में सात हजार गुना की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं। लिहाजा राज्य साइबर पुलिस भी इसे लेकर चिंतित हैं।

पिछले कुछ दिनों में पुलिस ने साइबर अवेयरनेस कार्यक्रम पहले से ज्यादा किए जा रहे हैं। पुलिस समय-समय पर ठगी से बचाने एडवाइजरी भी जारी करती है। थानों में पदस्थ पुलिस बल को साइबर एक्ट की कार्रवाई सिखाने ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं।

कॉलेज से लेकर कॉर्पोरेट ऑफिस तक अवेयरनेस कार्यक्रम

एडीजी योगेश देशमुख ने बताया कि बढते साइबर अपराधों की रोक थाम के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। कॉलेज, पब्लिक ईवेंट्स से लेकर कॉर्पोरेट ऑफिस तक अवेयरनेस कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। साइबर अपराधियों से सख्ती से निपटने और उनके खिलाफ सजा सुनिश्चित कराने के लिए सभी जिलों के थाना स्टाफ को आईटी एक्ट की सही कार्रवाई के संबंध में सिखाया जाता है। इससे आने वाले समय में निश्चित ही साइबर अपराधों में कमी दर्ज किए जाने में मदद मिलेगी।

साइबर ठगी के यह हैं नए ट्रेंड

अपराधी कॉल या वॉट्सऐप कॉल के जरिए करते हैं संपर्क। जिसमें अधिकांश कॉल +92 (पाकिस्तानी) नंबर या किसी अन्य देश के नंबर(+91 के अलावा) से आते हैं।

कॉलर आपको कॉल करके डराएगा और कहेगा कि आपके PAN/AADHAR कार्ड का उपयोग करके पार्सल भेजा गया है, जिसमें (नार्कोटिक्स) नशीली सामग्री पाई गई हैं। इसके अलावा जालसाज NCB/CBI/ED/NIA आदि एजेंसी के अधिकारी के नाम से बदल-बदल कर कभी कॉल, कभी व्हाट्सएप वीडियो कॉल करते हैं।

कहते हैं कि आपके नाम से एक पार्सल पकड़ा है,जिसमें (नार्कोटिक्स) नशीली सामग्री पाई गई हैं। ऐसे मामलों मे अपराधी कभी आपको कोर्ट फीस या जमानत देने के नाम से मांग की करते हैं।

इस तरह भी की जाती है ठगी

पहले अपराधी वीडियो कॉल के जरिए आपको पुलिस अधिकारी से बात करने को कहता हैं और फिर कॉल पर रहते हुए फर्जी नोटिस दिखाते हैं। जिसमें आपको डिजिटल अरेस्ट करते हुए घर में ही रहने को कहा जाता है और कहते हैं कि स्वयं को किसी कमरे में बंद करलें जिसमें किसी को भी अंदर न आने दिया जाए। इस दौरान कैमरे के सामने आपसे कुछ सवाल पूछे जाएंगे।

इस दौरान कमरे में कोई आया तो आप दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। धीरे-धीरे आपको और ज्यादा डराया जाता है और आपके निजी बैंक खाते तथा अन्य इन्वेस्टमेंट की जानकारी ले ली जाती हैं। अंत में यह कहकर की शायद आपको गलत फंसा लिया गया है। आप जांच पूरी होने तक अपना पैसा आरबीआई/भारत सरकार के खाते में जमा करवा दें। जो जांच पूरी होने के बाद आपको लौटा दिया जाएगा। इस पूरी जानकारी के दौरान आपको न ही किसी से संपर्क करने का मौका दिया जाता है, न ही बाहर जाने दिया जाता है। इस प्रकार आपसे मोटी रकम ले ली जाती है।
ठगी से बचने ते लिए यह सावधानी बर्तें...

अनजान नंबर खासकर जो +92 से शुरू होते हैं , से आने वाले कॉल, वॉट्सऐप कॉल/वीडियो कॉल, टेलीग्राम कॉल न उठाएं।

भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट का कोई नियम नहीं है। अतः किसी के कहने पर या डर से खुद को कहीं बंद न करें।

अपनी निजी जानकारी जैसे बैंक खाते संबंधी, आधार आदि को किसी के साथ साझा न करें।

कोई भी संस्था आपसे आपका निजी पैसा किसी भी शासकीय खाते में जमा करने या सुरक्षित करने की सलाह नही देता। अतः कभी भी अपना पैसा किसी अनजान खाते में ट्रांसफर न करें।

साइबर ठगी होने पर यहां शिकायत करें

यदि आपके साथ कोई साइबर अपराध घटित होता है, तो उसकी शिकायत अपने नजदीकी पुलिस थाने में या www.cybercrime.gov.in या Cyber Crime Help Line (Toll Free) नंबर 1930 पर दर्ज करें।


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