हाथों में शंख, चक्र, गदा और फूल... देवोत्थान एकादशी पर 'जमीन फटी' तो निकले 'भगवान विष्णु'

हाथों में शंख, चक्र, गदा और फूल... देवोत्थान एकादशी पर 'जमीन फटी' तो निकले 'भगवान विष्णु'
गोपालगंज : बिहार के गोपालगंज में एक किसान खेत की जुताई कर रहा था, इसी दौरान अचानक ही उसे भगवान विष्णु की प्राचीन मूर्ति मिली। जैसे ही ये जानकारी ग्रामीणों को हुई तो वहां भारी भीड़ जुट गई। लोगों ने इसे भगवान का आशीर्वाद और गांव के लिए सुख, समृद्धि की बात कर उसी स्थान पर मंदिर बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई। लोगों को जैसे ही जमीन के भीतर से प्राचीन मूर्ति मिली तो वो उसकी पूजा में जुट गए। मामले की सूचना प्रशासन को भी हुई तो गोपालपुर थाना प्रभारी रंजीत कुमार पासवान और बीडीओ सुनील मिश्रा भी मौके पर पहुंचे।

गोपालगंज में किसान के खेत से मिली प्राचीन मूर्ति​

पूरा मामला गोपालपुर थाना क्षेत्र के सोनिकपुर संत पट्टी का है। यहां पन्नालाल कुशवाहा के खेत में दीनानाथ का ट्रैक्टर लेकर ड्राइवर संजय शर्मा खेत की जुताई कर रहे थे। जुताई के दौरान ही ट्रैक्टर का हल किसी भारी चीज टकरा गया, जिससे काफी तेज आवाज हुई। तुरंत ही ट्रैक्टर ड्राइवर ने अपना काम रोका और जिस तरह से आवाज आई थी उसे देखना शुरू किया।

मूर्ति मिलने की सूचना के जुटी लोगों की भीड़

बताया जा रहा कि जांच में उसे जमीन में दबी एक भारी मूर्ति दिखाई दी। जब उसे निकाला गया और साफ सफाई की गई तो वो भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति जैसी नजर आई। इसके बाद यह सूचना गांव में आग की तरह फैल गई और ग्रामीण जुट गए। प्रशासन को भी सूचना प्राप्त हुई। गोपालपुर थाना प्रभारी रंजीत कुमार पासवान और बीडीओ सुनील कुमार मिश्रा पहुंचे। उन्होंने मूर्ति की जांच की। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि कहीं यह चोरी की प्रतिमा तो नहीं है।

मूर्ति को लेकर प्रशासन भी हुआ एक्टिव

इधर, ग्रामीण उसी स्थान पर विष्णु की प्रतिमा रखकर पूजा पाठ शुरू कर दी और मंदिर बनाने की तैयारी शुरू हो गई। ग्रामीण बताते हैं कि फिलहाल यहां पूजा पाठ शुरू है। मंदिर निर्माण के लिये जमीन मालिक की ओर से भी सहमति देने की बात बताई जा रही है। ग्रामीण मंदिर निर्माण के लिए चंदा करने में जुट गए। मूर्ति में दिख रहे भगवान विष्णु अपने हाथों में शंख, चक्र, गदा और पुष्प धारण किए हुए हैं।

मूर्ति मिलने वाली जगह पर मंदिर निर्माण की प्लानिंग में जुटे लोग

मुख्य प्रतिमा के तीन तरफ किनारे-किनारे अन्य देवी-देवताओं के छोटे-छोटे चित्र बने हुए हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि मूर्ति दो सौ से चार सौ वर्ष पुरानी होगी। ग्रामीण कहते हैं कि देवोत्थान एकादशी के दिन हरि की प्रतिमा मिलना गांव के लिए शुभ है। बताया जाता है कि पहले भी इस इलाके में हनुमान जी और राधाकृष्ण की भी मूर्ति मिल चुकी है।

मुख्य प्रतिमा के तीन तरफ किनारे-किनारे अन्य देवी-देवताओं के छोटे-छोटे चित्र बने हुए हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि मूर्ति दो सौ से चार सौ वर्ष पुरानी होगी। ग्रामीण कहते हैं कि देवोत्थान एकादशी के दिन हरि की प्रतिमा मिलना गांव के लिए शुभ है। बताया जाता है कि पहले भी इस इलाके में हनुमान जी और राधाकृष्ण की भी मूर्ति मिल चुकी है।
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