38 साल की राजकली का पूरा जीवन दुखों से भरा हुआ था। वह यहां अपनी चार साल की बेटी के साथ रहती हैं। राजकली ने बताया कि दस सालों के भीतर वह दो बार विधवा हुईं। जब वह भानवनात्मक रूप से पीड़ा झेल रही थीं, उस समय उनके जीवन में चटनी आई। राजकली का कहना है कि चटनी ने उन्हें जीवन में धैर्य रखने की ताकत दी। चटनी उनके लिए धन और स्वास्थ्य दोनों ही मामलों में बहुत लकी रही है। उन्होंने इस छठी समारोह के लिए एक लाख रुपये खर्च किए। गांव वालों को शाकाहारी व्यंजन परोसे गए। इसके अलावा प्रोफेशनल डांसर भी बुलाए गए थे। इन लोगों ने लोकधुनों पर परफॉर्म किया। इस मौके पर राजकली के घर और पूरी गली को रंग-बिरंगी झालरों और लाइट से सजाया गया।
पिल्लों के पंजों में लगाया आलता, महिलाओं ने गाए सोहर
राजकली ने बताया कि जैसे किसी परिवार में बच्चे का जन्म होने पर छठी कार्यक्रम किया जाता है, ठीक उसी तरह मैंने अपने पालतू डॉगी के बच्चों के लिए किया। चटनी और उसके सभी बच्चों के पंजों पर गांव की महिलाओं ने आलता (लाल रंग) लगाया। साथ ही सोहर भी गाया। जैसे ही आसपास के गांवों में यह सूचना फैली, लोग चटनी और उसके बच्चों के साथ सेल्फी खिंचवाने के लिए पहुंचने लगे। राजकली का कहना है कि चटनी ने इससे पहले भी बच्चे जन्में थे पर उनकी संख्या तीन या चार ही थी। इस बार जब उसने 9 बच्चों को जन्म दिया तो उन्होंने इसको सेलिब्रेट करने की सोची। राजकली अपने पति के खेतों पर खेती करवाती हैं। इसके अलावा उनके पास एक दर्जन से ज्यादा गाय और भैंसे हैं। इसका दूध बेचकर वह अपना परिवार चलाती हैं।











