चंद्रशेखरन एंड कंपनी को मिला SP ग्रुप का साथ, टाटा संस की लिस्टिंग का किया समर्थन

चंद्रशेखरन एंड कंपनी को मिला SP ग्रुप का साथ, टाटा संस की लिस्टिंग का किया समर्थन
नई दिल्ली: टाटा संस में दूसरी सबसे बड़ी हिस्सेदार शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप ने टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी की पब्लिक लिस्टिंग का समर्थन किया है। इस ग्रुप के पास टाटा संस की लगभग 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शापूरजी पल्लोनजी (SP) ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री ने कहा कि लिस्टिंग से भारत के सबसे अहम बिजनेस संस्थानों में से एक में पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ेगी।

उनके ये बयान टाटा संस के एक अहम शेयरहोल्डर की ओर से लिस्टिंग के लिए साफ सार्वजनिक समर्थन दिखाते हैं। यह ऐसे समय में हुआ है जब इस प्रस्ताव ने कंपनी के बोर्ड और इसे कंट्रोल करने वाले चैरिटेबल ट्रस्ट्स के बीच मतभेद उजागर कर दिए हैं। RBI द्वारा कंपनी की अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनैंशल कंपनी (NBFC) के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज किए जाने के बाद टाटा संस का बोर्ड लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने के पक्ष में है।

टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी

टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में कुल मिलाकर लगभग 66% हिस्सेदारी है। उन्होंने लिस्टिंग का विरोध किया है और उनके चेयरमैन नोएल टाटा ने कंपनी से दूसरे विकल्पों पर विचार करने को कहा है। मिस्त्री ने एक बयान में कहा कि लिस्टिंग सिर्फ एक फाइनैंशल या रेगुलेटरी मामला नहीं है, बल्कि एक ‘सामाजिक और नैतिक जरूरत’ है। उन्होंने इसे टाटा ट्रस्ट्स की परोपकारी भूमिका को बनाए रखते हुए गवर्नेंस को मजबूत करने का एक मौका बताया।

अब विवाद इस बात पर है कि क्या टाटा संस RBI की रेगुलेटरी जरूरतों और टाटा ट्रस्ट्स की कंपनी के मौजूदा प्राइवेट स्ट्रक्चर को बनाए रखने की इच्छा के बीच तालमेल बिठा सकती है। ट्रस्ट्स ने टाटा संस की लिस्टिंग के विकल्प के तौर पर कम से कम 25,000 करोड़ के ट्रांजैक्शन के जरिए SP ग्रुप को लिक्विडिटी देने का प्रस्ताव दिया है।

आरबीआई का फैसला

उन्होंने कहा कि RBI के फैसले से ‘पूरी स्पष्टता’ मिली है और टाटा संस को अब अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनैंशल कंपनियों (NBFCs) के लिए बने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का पालन करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। RBI ने 11 सितंबर को टाटा संस की उस अर्जी को खारिज कर दिया जिसमें उसने स्वेच्छा से कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की मांग की थी।

RBI ने कंपनी को अपर-लेयर NBFCs पर लागू होने वाले नियमों का पालन करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया। टाटा संस ने 21,813 करोड़ का कर्ज चुकाने के बाद मार्च 2024 में डी-रजिस्ट्रेशन की मांग की थी।

SP ग्रुप का समर्थन क्यों है अहम?

SP ग्रुप का समर्थन इसलिए अहम है क्योंकि यह दूसरी सबसे बड़ी हिस्सेदार को टाटा संस बोर्ड के साथ खड़ा करता है, जबकि कंपनी की कंट्रोलिंग हिस्सेदार लिस्टिंग का विरोध कर रही है। हालांकि ट्रस्ट्स की बहुमत हिस्सेदारी उन्हें काफी शेयरहोल्डर पावर देती है, लेकिन SP ग्रुप का रुख बोर्ड के इस तर्क को मजबूती देता है कि टाटा संस को ज्यादा सार्वजनिक जवाबदेही की ओर बढ़ना चाहिए।

मिस्त्री ने कहा कि लिस्टिंग से पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही को मजबूत करने में मदद मिल सकती है, साथ ही टाटा ट्रस्ट की परोपकारी भूमिका भी बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से जवाबदेह टाटा संस निवेशकों की भागीदारी बढ़ा सकती है, वैल्यू के बारे में बेहतर जानकारी दे सकती है और परोपकारी कार्यों के लिए फंडिंग का मजबूत आधार तैयार कर सकती है।
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