कैश केस- जस्टिस वर्मा की सुप्रीम कोर्ट में याचिका:जांच समिति की रिपोर्ट रद्द करने की मांग

कैश केस- जस्टिस वर्मा की सुप्रीम कोर्ट में याचिका:जांच समिति की रिपोर्ट रद्द करने की मांग

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कैश कांड केस में खुद को दोषी ठहराने वाली जांच रिपोर्ट को रद्द करने की मांग की है।

जस्टिस वर्मा ने गुरुवार को अपील में कहा, 'उनके खिलाफ जो कार्यवाही की गई, वह न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। मुझे खुद को साबित करने का पूरा मौका नहीं दिया गया। कार्यवाही में एक व्यक्ति और एक संवैधानिक अधिकारी दोनों के अधिकारों का उल्लंघन किया गया है।'

यह याचिका संसद का मानसून सत्र शुरू होने से कुछ दिन पहले आई है। सत्र के दौरान जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया जा सकता है।

पहले समझिए जस्टिस वर्मा का कैश कांड क्या है

जस्टिस वर्मा के लुटियंस स्थित बंगले पर 14 मार्च की रात 11:35 बजे आग लगी थी। इसे अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने बुझाया था। घटना के वक्त जस्टिस वर्मा शहर से बाहर थे।

21 मार्च को कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि जस्टिस वर्मा के घर से 15 करोड़ कैश मिला था। काफी नोट जल गए थे।

22 मार्च को सीजे आई संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की इंटरनल जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई। पैनल ने 4 मई को CJI को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसमें जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया गया था।

रिपोर्ट के आधार पर ‘इन-हाउस प्रोसीजर’ के तहत CJI खन्ना ने सरकार से जस्टिस वर्मा को हटाने की सिफारिश की थी। जांच समिति में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, हिमाचल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस संधवालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की जज जस्टिस अनु शिवरामन थीं।

जांच रिपोर्ट 19 जून को सामने आई थी

कैश केस की जांच कर रहे सुप्रीम कोर्ट के पैनल की रिपोर्ट 19 जून को सामने आई थी। 64 पेज की रिपोर्ट में कहा गया कि जस्टिस यशवंत वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों का स्टोर रूम पर सीक्रेट या एक्टिव कंट्रोल था।

10 दिनों तक चली जांच में 55 गवाहों से पूछताछ हुई और जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास का दौरा किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि आरोपों में पर्याप्त तथ्य हैं। आरोप इतने गंभीर हैं कि जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए कार्यवाही शुरू करनी चाहिए।

55 लोगों के बयान दर्ज; गवाह, किसने क्या कहा

स​मिति ने 55 गवाहों के बयान दर्ज किए। इनमें दिल्ली फायर सर्विस के 11, दिल्ली पुलिस के 14, CRPF के 6, जस्टिस वर्मा के घरेलू व कोर्ट स्टाफ के 18 लोग, जस्टिस वर्मा व उनकी बेटी आदि शामिल हैं।

  • दिल्ली फायर सर्विसेज के अफसर अंकित सेहवाग ने 23 मार्च का बयान दर्ज करते वक्त बताया, ' मुझे प्रदीप कुमार और परविंदर मलिक (दमकल कर्मचारी) ने बताया कि स्टोर रूम में आग लगी है। वहां करेंसी नोट जल रहे हैं। मैंने टॉर्च की रोशनी में जाकर देखा। वहां बहुत सारे 500 रुपए के नोट आधे जले हुए थे। पानी से नोट गीले हो गए थे और आग से कुछ हिस्से जले थे, पर साफ दिख रहा था कि ये 500 रु. के नोट थे।
  • सीआरपीएफ और सुरक्षा कर्मी ने बताया, 'स्टोर रूम के दरवाजे पर ताला रहता था। कोई बिना अनुमति नहीं जा सकता था। कुछ ने दरवाजा तोड़ने में मदद की ​थी।'

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